ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: पेजेश्कियन बोले — सुरक्षा बिना विकास टिकाऊ नहीं, संप्रभुता की रक्षा में ब्रिक्स बने प्रभावी मंच
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और बल प्रयोग पर रोक सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स को एक और अधिक प्रभावी एवं सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आर्थिक प्रगति और विकास दीर्घकालिक तभी हो सकता है जब सुरक्षा का वातावरण सुनिश्चित हो।
सुरक्षा और संप्रभुता पर पेजेश्कियन का आह्वान
पेजेश्कियन ने कहा, 'अगर सैन्य आक्रमण, लोगों की हत्या और उनकी ज़िंदगी बर्बाद किए जाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय कानून की बात करना मुश्किल हो जाता है।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ब्रिक्स को राष्ट्रीय संप्रभुता, देशों की क्षेत्रीय अखंडता और बल प्रयोग पर रोक की रक्षा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंताएँ उभरती रही हैं।
एकतरफा प्रतिबंध और आम जनता पर असर
पेजेश्कियन ने कहा कि आज एकतरफा प्रतिबंध केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गए हैं, बल्कि उनका सीधा असर खाद्य सुरक्षा और आम लोगों की भलाई पर भी पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे प्रतिबंध वास्तव में नागरिकों को दंडित करते हैं, न कि सरकारों को।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा व्यवस्था और विकास से जुड़ी बुनियादी संरचनाओं को निशाना बनाने का असर बहुत जल्दी उस देश की सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे क्षेत्र और दुनिया पर पड़ सकता है।
ईरान पर सैन्य कार्रवाई का संदर्भ
पेजेश्कियन ने अपने क्षेत्र में हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई ने देश की बुनियादी संरचनाओं को भारी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि इन हमलों की भारी कीमत ईरानी जनता को चुकानी पड़ी है — पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और अन्य नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने किसी बहुपक्षीय मंच पर इन कार्रवाइयों की अंतरराष्ट्रीय निंदा की माँग की हो, लेकिन ब्रिक्स जैसे प्रभावशाली आर्थिक समूह में यह आग्रह एक नई रणनीतिक दिशा का संकेत देता है।
आर्थिक मज़बूती के लिए साझा क्षमता का आग्रह
पेजेश्कियन के अनुसार, ब्रिक्स देशों को राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाकर और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को मजबूत बनाकर सदस्य देशों की आर्थिक मजबूती के लिए साझा क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वित्तीय स्वतंत्रता और सुरक्षा एक-दूसरे से अविभाज्य हैं।
यह प्रस्ताव डी-डॉलरीकरण की उस व्यापक बहस के अनुरूप है जो हाल के ब्रिक्स सम्मेलनों में लगातार उठती रही है।
नागरिक सुरक्षा की अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारी
पेजेश्कियन ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि ये घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उस बड़ी ज़िम्मेदारी की याद दिलाती हैं जिसके तहत नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और नागरिक ठिकानों पर हमलों को सामान्य या स्वीकार्य नहीं बनने दिया जाना चाहिए। आगे चलकर यह देखना होगा कि ब्रिक्स देश इन प्रस्तावों पर किस हद तक साझा राय बना पाते हैं।