नसीम खान का आरोप: संसद में NEET लीक और राम मंदिर दान चोरी पर चर्चा से भाग रही है सरकार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता नसीम खान ने सोमवार, 20 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नीत सरकार संसद के मॉनसून सत्र में जनहित के ज्वलंत मुद्दों पर बहस से जानबूझकर बच रही है और इस तरह विपक्ष की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक, राम मंदिर में कथित दान चोरी और बढ़ती बेरोज़गारी जैसे गंभीर विषयों पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए।
संसद में हंगामे की असली वजह
नसीम खान ने कहा कि संसद देश और जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है। उनके अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार सरकार से माँग कर रहे हैं कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित दान चोरी और NEET पेपर लीक जैसे संवेदनशील विषयों पर सदन में विस्तृत चर्चा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार हो जाए तो सदन सुचारु रूप से चल सकता है — बाधा विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति के कारण है।
NEET लीक और युवाओं का भविष्य
खान ने कहा कि NEET पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और यह मामला महज़ परीक्षा की अनियमितता नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के सपनों से जुड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष और युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है और इसीलिए सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र इस परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं।
सीजेपी मार्च और लोकतांत्रिक अधिकार
सोनम वांगचुक और सीजेपी के संसद मार्च को रोके जाने पर खान ने कहा कि देश में लोकतंत्र पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) सत्ता का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमज़ोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन शांतिपूर्ण ढंग से धरना, प्रदर्शन या मार्च करना चाहता है तो उसे अनुमति मिलनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया जाता है और आँसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं।
शिवसेना (UBT) सांसदों का दलबदल — 'जनता से धोखा'
उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों को शिंदे गुट में शामिल होने की मान्यता मिलने पर नसीम खान ने इसे जनता के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने महा विकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवारों को BJP के विरुद्ध मतदान कर लोकसभा भेजा था। उनके अनुसार, इन सांसदों ने दबाव या अन्य कारणों से दल बदलने का फैसला किया है और भविष्य में मतदाता उन्हें इसके लिए माफ नहीं करेंगे।
वंदे मातरम बिल और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
'वंदे मातरम बिल' को लेकर खान ने कहा कि विपक्ष हर उस कदम का समर्थन करता है जो वास्तव में जनहित में हो। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी विशेष वर्ग को निशाना बनाने या वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के उद्देश्य से कोई विधेयक लाया जाता है, तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके अनुसार, आज देश के सामने महंगाई, बेरोज़गारी और युवाओं के भविष्य जैसे ठोस मुद्दे हैं, लेकिन सरकार इन पर चर्चा के बजाय अन्य विषयों को आगे ला रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने मॉनसून सत्र में सरकार पर बहस से बचने का आरोप लगाया हो — यह एक दीर्घकालिक संसदीय विवाद का हिस्सा बन चुका है।