चंद्रशेखर आजाद का योगी सरकार पर हमला: एसआईआर बंद करो, पुरानी पेंशन बहाल करो
सारांश
मुख्य बातें
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 27 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से बंद करने और राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की माँग की। यह बयान योगी कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले आया, जिसे राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एसआईआर और मतदाता सूची विवाद
चंद्रशेखर आजाद ने एसआईआर प्रक्रिया पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा, 'एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से रोक दिया जाना चाहिए और डिजिटल वोटर लिस्ट पर भी रोक लगनी चाहिए।' उन्होंने दावा किया कि मुजफ्फरनगर के मीरापुर का डेटा उन्होंने सबसे पहले सामने रखा, जिसमें कुछ लोगों के नाम पर 24 से 40 तक वोट दर्ज थे।
सांसद ने सवाल उठाया कि यदि एमएलसी चुनावों में ही वोटर लिस्ट में इतनी गड़बड़ियाँ हैं, तो मुख्य चुनाव कैसे निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दिया है कि एसआईआर को लेकर सर्वसम्मति से फैसले लिए गए, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के बीच मतभेद जगज़ाहिर हैं।
पुरानी पेंशन बहाली और कर्मचारी आंदोलन
आजाद ने योगी कैबिनेट बैठक से पहले राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाली की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायक एक सप्ताह से अधिक समय से आंदोलन कर रहे थे, जिन्हें सरकार ने हटा दिया। इसी तरह एएनएम, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएँ भी अपनी माँगों के लिए संघर्षरत हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, 'सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में जनता के लिए कुछ खास नहीं किया। अब मतदाताओं को अपने खेमे में करने के लिए एक तरह से खरीदने की कोशिश सरकार कर रही है।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनता और कर्मचारियों का भला होना चाहिए, और सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करनी ही चाहिए।
अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे पर तंज
चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के 'पीडीए' (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नारे पर भी तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने पूछा कि अखिलेश को बताना चाहिए कि अपनी सरकार में पिछड़े वर्ग के लिए कौन से काम किए।
उन्होंने उदाहरण दिया कि बसपा सरकार में पूर्व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक के पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलती थी, जिसे अखिलेश सरकार के आने पर बंद कर दिया गया। इसी तरह पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से रोज़गार ऋण योजना को भी सपा सरकार ने बंद कर दिया था।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल गर्माने लगा है। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष है और यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। चंद्रशेखर आजाद का यह रुख उन्हें भाजपा और सपा, दोनों से अलग एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के रूप में स्थापित करता है। आने वाले दिनों में योगी कैबिनेट के फैसले और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।