27 अक्टूबर 2026
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चंद्रशेखर आजाद का योगी सरकार पर हमला: एसआईआर बंद करो, पुरानी पेंशन बहाल करो

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चंद्रशेखर आजाद का योगी सरकार पर हमला: एसआईआर बंद करो, पुरानी पेंशन बहाल करो

सारांश

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रयागराज में एक साथ तीन मोर्चे खोले — एसआईआर प्रक्रिया पर रोक, पुरानी पेंशन की बहाली और अखिलेश यादव के पीडीए नारे की पोल। योगी कैबिनेट बैठक से ठीक पहले आया यह बयान उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

मुख्य बातें

चंद्रशेखर आजाद ने 27 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज में एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल बंद करने की माँग की।
मुजफ्फरनगर के मीरापुर में एक व्यक्ति के नाम पर 24 से 40 तक वोट दर्ज होने का डेटा उन्होंने सामने रखा।
राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की माँग; पंचायत सहायक, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संघर्ष का ज़िक्र।
अखिलेश यादव के पीडीए नारे पर कटाक्ष; सपा सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति और ऋण योजना बंद करने का आरोप।
चुनाव आयोग के सर्वोच्च न्यायालय में दिए हलफनामे पर सवाल; आयुक्तों के बीच मतभेद को उठाया।

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 27 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से बंद करने और राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की माँग की। यह बयान योगी कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले आया, जिसे राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एसआईआर और मतदाता सूची विवाद

चंद्रशेखर आजाद ने एसआईआर प्रक्रिया पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा, 'एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से रोक दिया जाना चाहिए और डिजिटल वोटर लिस्ट पर भी रोक लगनी चाहिए।' उन्होंने दावा किया कि मुजफ्फरनगर के मीरापुर का डेटा उन्होंने सबसे पहले सामने रखा, जिसमें कुछ लोगों के नाम पर 24 से 40 तक वोट दर्ज थे।

सांसद ने सवाल उठाया कि यदि एमएलसी चुनावों में ही वोटर लिस्ट में इतनी गड़बड़ियाँ हैं, तो मुख्य चुनाव कैसे निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दिया है कि एसआईआर को लेकर सर्वसम्मति से फैसले लिए गए, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के बीच मतभेद जगज़ाहिर हैं।

पुरानी पेंशन बहाली और कर्मचारी आंदोलन

आजाद ने योगी कैबिनेट बैठक से पहले राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाली की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायक एक सप्ताह से अधिक समय से आंदोलन कर रहे थे, जिन्हें सरकार ने हटा दिया। इसी तरह एएनएम, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएँ भी अपनी माँगों के लिए संघर्षरत हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, 'सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में जनता के लिए कुछ खास नहीं किया। अब मतदाताओं को अपने खेमे में करने के लिए एक तरह से खरीदने की कोशिश सरकार कर रही है।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनता और कर्मचारियों का भला होना चाहिए, और सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करनी ही चाहिए।

अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे पर तंज

चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के 'पीडीए' (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नारे पर भी तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने पूछा कि अखिलेश को बताना चाहिए कि अपनी सरकार में पिछड़े वर्ग के लिए कौन से काम किए।

उन्होंने उदाहरण दिया कि बसपा सरकार में पूर्व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक के पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलती थी, जिसे अखिलेश सरकार के आने पर बंद कर दिया गया। इसी तरह पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से रोज़गार ऋण योजना को भी सपा सरकार ने बंद कर दिया था।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा

यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल गर्माने लगा है। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष है और यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। चंद्रशेखर आजाद का यह रुख उन्हें भाजपा और सपा, दोनों से अलग एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के रूप में स्थापित करता है। आने वाले दिनों में योगी कैबिनेट के फैसले और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों को एक साथ घेरकर खुद को दलित-पिछड़े वर्ग का एकमात्र विश्वसनीय आवाज़ के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। एसआईआर विवाद वास्तव में गंभीर है और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि चुनाव आयोग के भीतर के मतभेद संस्थागत विश्वसनीयता के लिए कहीं बड़ा खतरा हैं। पुरानी पेंशन की माँग राज्य कर्मचारियों में व्यापक असंतोष को दर्शाती है, जो उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मतदाता वर्ग है और जिसे दोनों प्रमुख दल अब तक संतुष्ट नहीं कर पाए हैं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक विशेष प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम काटे गए और एक व्यक्ति के नाम पर कई वोट दर्ज किए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने मीरापुर के डेटा का ज़िक्र क्यों किया?
चंद्रशेखर आजाद के अनुसार उन्होंने मुजफ्फरनगर के मीरापुर का वह डेटा सबसे पहले सार्वजनिक किया जिसमें कुछ लोगों के नाम पर 24 से 40 तक वोट दर्ज थे। उनका तर्क है कि यदि एमएलसी चुनावों में ही इतनी अनियमितताएँ हैं, तो विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता पर भरोसा कैसे किया जाए।
उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना बहाली की माँग कितनी पुरानी है?
राज्य कर्मचारी संगठन लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना बहाली की माँग कर रहे हैं। हाल ही में पंचायत सहायकों ने एक सप्ताह से अधिक आंदोलन किया और एएनएम, आशा वर्कर तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएँ भी अपनी माँगों को लेकर सक्रिय हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने अखिलेश यादव के पीडीए नारे को चुनौती क्यों दी?
चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की सपा सरकार ने बसपा काल में चलाई जा रही पिछड़े वर्ग की छात्रवृत्ति योजना और पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम की ऋण योजना दोनों को बंद कर दिया था। उनका कहना है कि पीडीए का नारा लगाने से पहले अखिलेश को अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा देना चाहिए।
योगी कैबिनेट बैठक से पहले चंद्रशेखर आजाद के इस बयान का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह बयान कैबिनेट बैठक से ठीक पहले आया है, जब चुनावी माहौल में सरकार से बड़े फैसलों की उम्मीद लगाई जा रही है। चंद्रशेखर ने स्पष्ट संकेत दिया कि जनता को भाजपा के वादों पर भरोसा नहीं है और वे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत इस समय बयान दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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