सुरेंद्रनाथ कॉलेज फंड गबन: कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC नेता देवाशीष बंद्योपाध्याय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 8 अगस्त 2026 को सुरेंद्रनाथ कॉलेज फंड गबन मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता देवाशीष बंद्योपाध्याय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय सुनाया, जिससे बंद्योपाध्याय की गिरफ्तारी का खतरा अब और बढ़ गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
देवाशीष बंद्योपाध्याय के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा पाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। गौरतलब है कि सुरेंद्रनाथ कॉलेज के यूनियन रूम से एक बंदूक और नकदी से भरे दो सूटकेस बरामद हुए थे, जिसके बाद जाँच एजेंसियाँ वित्तीय अनियमितताओं और धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों की पड़ताल कर रही हैं।
मुचीपारा पुलिस स्टेशन ने पूर्व शासी निकाय सदस्य देवाशीष बंद्योपाध्याय और विक्रेता परितोष दत्ता के विरुद्ध कॉलेज परिसर के भीतर अवैध रूप से कमरों पर कब्जा करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया है। TMC के इन दो पदाधिकारियों पर शस्त्र अधिनियम, आपराधिक अतिक्रमण, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से रोकने वाले अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
राज्य सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत आवेदन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि देवाशीष बंद्योपाध्याय इलाके में एक प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते हैं और उनकी रिहाई से मामले की निष्पक्ष जाँच पर असर पड़ने की आशंका है।
राज्य पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले की जाँच अभी जारी है और इस चरण में आरोपी को अग्रिम जमानत देना जाँच एजेंसियों के कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकता है। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए याचिका अस्वीकार कर दी।
हाई कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद देवाशीष बंद्योपाध्याय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कोलकाता में शिक्षण संस्थानों से जुड़े वित्तीय अनियमितता के मामलों पर न्यायपालिका की सख्त नजर बनी हुई है।
जाँच पर असर और आगे की राह
हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद सुरेंद्रनाथ कॉलेज फंड गबन मामले की जाँच को और गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। जाँच एजेंसियाँ अब बिना किसी अदालती बाधा के आरोपी से पूछताछ कर सकती हैं। यह मामला TMC के लिए राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है, क्योंकि बंद्योपाध्याय पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ एक जाने-माने अधिवक्ता भी हैं।