तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो का बड़ा अभियान: दक्षिण भारत में 101 गिरफ्तार, ₹17 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) ने 7 अक्टूबर 2026 को दक्षिण भारत में चलाए गए एक व्यापक बहु-राज्यीय साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत 18 महिलाओं सहित कुल 101 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जाँच में कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों के ज़रिए लगभग ₹17 करोड़ के धोखाधड़ी वाले वित्तीय लेन-देन का पता चला है।
अभियान का दायरा और संचालन
TGCSB की निदेशक शिखा गोयल के अनुसार, यह अभियान 23 सितंबर 2026 को शुरू हुआ और दो सप्ताह तक चला। इसे केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी — छह राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में एक साथ संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य सीमाओं के पार सक्रिय साइबर वित्तीय अपराध नेटवर्क की पहचान करना और उन्हें निष्क्रिय करना था।
गोयल ने बताया कि इस समन्वित कार्रवाई के लिए 100 से अधिक TGCSB कर्मियों की छह विशेष टीमें मैदान में उतारी गई थीं। गौरतलब है कि यह ब्यूरो द्वारा चलाया गया दूसरा समवर्ती बहु-राज्यीय अभियान है, जो साइबर अपराधियों के खिलाफ एजेंसी के बढ़ते आक्रामक रुख को दर्शाता है।
राज्यवार गिरफ्तारियाँ
गिरफ्तार किए गए 101 आरोपियों में से 19 की पहचान एजेंट के रूप में और 81 की पहचान अवैध लेन-देन खाताधारकों के रूप में की गई है। राज्यवार आँकड़ों के अनुसार सर्वाधिक 35 गिरफ्तारियाँ केरल से हुईं, इसके बाद आंध्र प्रदेश से 22, कर्नाटक से 17, तमिलनाडु से 14, तेलंगाना से 12 और पुडुचेरी से एक आरोपी पकड़ा गया।
अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक भी जब्त किए गए, जिनका कथित तौर पर धोखाधड़ी वाले लेन-देन में इस्तेमाल किया जा रहा था।
आरोपियों की प्रोफ़ाइल
जाँच से सामने आए आँकड़ों के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति विविध आयु, पेशे और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के हैं। 82 प्रतिशत आरोपी 20 से 50 वर्ष की आयु के बीच के हैं, जबकि 17 प्रतिशत की उम्र 50 वर्ष से अधिक है। पेशेवर वर्गीकरण में व्यवसाय/स्वरोजगार सबसे बड़ा समूह (23 प्रतिशत) रहा, इसके बाद निजी कर्मचारी (13 प्रतिशत), गृहिणियाँ (10 प्रतिशत), ड्राइवर/ऑपरेटर (7 प्रतिशत) और बिक्री/विपणन (5 प्रतिशत) हैं।
शैक्षिक पृष्ठभूमि के आँकड़े और भी चौंकाने वाले हैं: 24 प्रतिशत स्नातक/डिग्री धारक हैं और 3 प्रतिशत के पास B.Tech व नर्सिंग जैसी व्यावसायिक योग्यताएँ हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध में उच्च शिक्षितों की भागीदारी भी उल्लेखनीय है।
प्रमुख मामले
अभियान के दौरान कई उल्लेखनीय प्रोफाइल सामने आईं। एक प्रमुख कंपनी के कर्मचारी ने कथित तौर पर कमीशन के बदले साइबर अपराधियों के लिए फर्जी बैंक खाते खोलने में एजेंट की भूमिका निभाई। इसी तरह, मुद्रा विनिमय व्यवसाय में कार्यरत एक स्नातक भी कमीशन के आधार पर इसी गतिविधि में सहायक रहा। सबसे चिंताजनक मामला एक पूर्व सैनिक का है जो देश भर में छह साइबर अपराध मामलों से जुड़ा पाया गया।
आगे की कार्रवाई
TGCSB ने संकेत दिए हैं कि इस अभियान में पहचाने गए नेटवर्क की जाँच आगे भी जारी रहेगी। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश भर में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की जा रही है और केंद्र सरकार राज्य एजेंसियों को समन्वित कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बहु-राज्यीय अभियान डिजिटल धोखाधड़ी की रीढ़ कहे जाने वाले खाता-नेटवर्क को तोड़ने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।