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TMC में बढ़ता असंतोष, अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार नहीं: BJP विधायक दीपंजन गुहा का दावा

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TMC में बढ़ता असंतोष, अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार नहीं: BJP विधायक दीपंजन गुहा का दावा

सारांश

BJP विधायक दीपंजन कुमार गुहा का दावा है कि TMC अब ‘एक-नेता वाली’ पार्टी बन गई है और अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व कोई वरिष्ठ नेता स्वीकार नहीं कर रहा। चंदननगर के सभी 30 पार्षदों के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार ने वहाँ प्रशासक नियुक्त किए हैं, जो स्थानीय निकाय चुनाव तक काम करेंगे।

मुख्य बातें

BJP विधायक दीपंजन कुमार गुहा ने 4 जून को कोलकाता में TMC पर ‘कमज़ोर’ और विचारधारा-विहीन होने का आरोप लगाया।
उनका दावा — TMC में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को कोई वरिष्ठ नेता स्वीकार नहीं कर रहा।
चंदननगर के सभी 30 पार्षदों ने इस्तीफा देकर ज़िम्मेदारियाँ छोड़ दीं।
राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में नियुक्त किया है।
यह व्यवस्था स्थानीय निकाय चुनाव होने तक जारी रहेगी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक दीपंजन कुमार गुहा ने 4 जून को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि पार्टी अब एक ‘एक-नेता वाली संरचना’ में सिमट गई है, जहाँ अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने वाला कोई वरिष्ठ नेता नहीं बचा। उन्होंने TMC को विचारधारा-विहीन और अंदरूनी कलह से जूझती हुई ‘कमज़ोर पार्टी’ बताया।

मुख्य आरोप

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में गुहा ने कहा, ‘TMC को लेकर हमारा नज़रिया शुरू से ही साफ़ रहा है कि सत्ता जाने के बाद यह काँच के घर की तरह बिखर जाएगी। हमें हमेशा से ही इस बात का अंदेशा था।’ उनके अनुसार पार्टी का एकमात्र विषय ‘सत्ता की कुर्सी’ है और इसी कारण नेताओं का आपसी टकराव अनिवार्य था।

अभिषेक बनर्जी पर निशाना

BJP विधायक ने कथित तौर पर कहा कि TMC में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को कोई स्वीकार नहीं कर रहा। उन्होंने दावा किया, ‘जिस भी नेता में थोड़ा भी स्वाभिमान बाकी होगा, वह उनके साथ काम नहीं कर सकता।’ यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव को लेकर लगातार अटकलें चल रही हैं।

चंदननगर पार्षदों के इस्तीफे

गुहा ने बताया कि चंदननगर में सभी 30 पार्षदों ने इस्तीफा देकर अपनी ज़िम्मेदारियाँ छोड़ दी हैं। उनके अनुसार, इस स्थिति में जनता का कामकाज ठप न हो, इसलिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) के रूप में नियुक्त किया है। यह व्यवस्था स्थानीय निकाय चुनाव होने तक जारी रहेगी।

जनता पर असर और BJP का रुख

विधायक ने माना कि जनप्रतिनिधि न होने से लोगों को कुछ कठिनाइयाँ झेलनी होंगी, क्योंकि जनता और प्रशासन के बीच सीधा संपर्क घटेगा। उन्होंने कहा कि BJP कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर जनता का सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि उन्होंने प्रशासक नियुक्ति के सरकारी फैसले की सराहना करते हुए कहा, ‘लोगों को अधिक समस्या न हो, इसलिए सरकार की इस व्यवस्था पर हम साधुवाद देते हैं।’

क्या होगा आगे

राजनीतिक हलकों में यह आरोप ऐसे समय आया है जब बंगाल में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं। आलोचकों का कहना है कि चंदननगर जैसे शहरी निकायों में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे TMC के संगठनात्मक तनाव की ओर इशारा करते हैं, हालाँकि पार्टी की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतज़ार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि TMC के शहरी निकाय ढाँचे में गहराते तनाव का संकेत है — और BJP इसे ‘ममता-बाद’ की राजनीति के नैरेटिव में ढालने की कोशिश में है। अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका को लेकर पार्टी के पुराने गुटों में बेचैनी कोई नई बात नहीं, पर यह पहली बार है जब विरोधी इसे संगठनात्मक संकट के रूप में पेश कर पा रहे हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या TMC नेतृत्व इन इस्तीफों को आंतरिक अनुशासन का मामला मानकर निपटाता है, या यह उभरते बागी रुझान का पहला चरण साबित होगा। बंगाल के स्थानीय निकाय चुनावों से पहले ऐसे घटनाक्रम चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP विधायक दीपंजन कुमार गुहा ने TMC पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने TMC को विचारधारा-विहीन, अंदरूनी कलह से जूझती ‘कमज़ोर पार्टी’ बताया और दावा किया कि यह अब ‘एक-नेता वाली संरचना’ में सिमट गई है। उनके अनुसार पार्टी का एकमात्र लक्ष्य ‘सत्ता की कुर्सी’ है।
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर गुहा का क्या कहना है?
गुहा का दावा है कि TMC में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को कोई वरिष्ठ नेता स्वीकार नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि स्वाभिमानी नेता उनके साथ काम नहीं कर सकेंगे।
चंदननगर में क्या हुआ है?
चंदननगर के सभी 30 पार्षदों ने अपनी ज़िम्मेदारियाँ छोड़ते हुए इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में नियुक्त किया है ताकि नागरिक सेवाएँ बाधित न हों।
एडमिनिस्ट्रेटर कब तक कार्यभार सँभालेंगे?
BJP विधायक के अनुसार, एडमिनिस्ट्रेटर तब तक काम करेंगे जब तक स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न नहीं हो जाते। तब तक जनप्रतिनिधि न होने से नागरिकों को कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व क्या है?
पश्चिम बंगाल के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे और नेतृत्व पर सवाल TMC के लिए संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह पार्टी के भीतर गहराते तनाव का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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