यूपी एसटीएफ ने दिल्ली से नाइजीरियाई साइबर ठग गिरफ्तार, ₹10 करोड़ का मेथामफेटामाइन बरामद
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) ने नई दिल्ली से नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर (उम्र 27 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के ज़रिए भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक संगठित साइबर धोखाधड़ी रैकेट का संचालन कर रहा था। 19 जुलाई को की गई इस गिरफ्तारी में एसटीएफ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ संयुक्त अभियान चलाया और आरोपी के पास से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत ₹10 करोड़ से अधिक आँकी गई है।
कैसे चलाया जाता था रैकेट
एसटीएफ के अनुसार, ओबेस प्रॉस्पर खुद को अमेरिकी या ब्रिटिश नागरिक बताकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के ज़रिए भारत सहित अन्य देशों के युवाओं से दोस्ती करता था। एक बार विश्वास जीतने के बाद वह पीड़ितों को बताता था कि उनके लिए महँगे तोहफे या विदेशी मुद्रा वाले पार्सल भेजे जा रहे हैं।
इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को कस्टम अधिकारी या इनकम टैक्स विभाग का अफसर बताकर पीड़ितों से कहते थे कि पार्सल एयरपोर्ट पर जब्त हो गया है और उसे छुड़ाने के लिए टैक्स या शुल्क जमा करना होगा। इस तरीके से गिरोह ने कथित तौर पर पीड़ितों से लाखों रुपए ठगे।
लखनऊ के युवक से ₹68 लाख की ठगी
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, एक मामले में आरोपी ने फेसबुक के ज़रिए लखनऊ के डालीगंज निवासी एक युवक से दोस्ती की और कथित तौर पर उससे ₹68 लाख की ठगी की। इस धोखाधड़ी में आरोपी के साथी उचेनवा ने भी सहयोग किया था। इस मामले में मदेहगंज पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
15 मई को एसटीएफ ने दिल्ली में प्रॉस्पर के एक साथी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। उस पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर यह सामने आया कि प्रॉस्पर ड्रग तस्करी में भी संलिप्त है। इसके बाद एसटीएफ और NCB ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे साउथ दिल्ली के राजू पार्क, मकान नंबर 2/10 से गिरफ्तार किया।
बरामदगी में 5.085 किग्रा मेथामफेटामाइन के अलावा पाँच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट भी शामिल हैं।
अवैध प्रवास और सिंडिकेट का खुलासा
पूछताछ में ओबेस प्रॉस्पर ने बताया कि वह 2023 में मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था, लेकिन वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह और उसके साथी अवैध रूप से देश में रह रहे थे। उसने स्वीकार किया कि इस सिंडिकेट में कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं जो फर्जी विदेशी पहचान अपनाकर ऑनलाइन ठगी करते थे।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों की संलिप्तता चिंता का विषय बनती जा रही है। एसटीएफ अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।