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यूपी एसटीएफ ने दिल्ली से नाइजीरियाई साइबर ठग गिरफ्तार, ₹10 करोड़ का मेथामफेटामाइन बरामद

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यूपी एसटीएफ ने दिल्ली से नाइजीरियाई साइबर ठग गिरफ्तार, ₹10 करोड़ का मेथामफेटामाइन बरामद

सारांश

यूपी एसटीएफ और NCB के संयुक्त अभियान में दिल्ली से नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर गिरफ्तार — फर्जी अमेरिकी-ब्रिटिश पहचान से साइबर ठगी और ₹10 करोड़ से अधिक का मेथामफेटामाइन बरामद। लखनऊ के एक युवक से ₹68 लाख की ठगी का मामला भी जुड़ा।

मुख्य बातें

यूपी एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने संयुक्त अभियान में 19 जुलाई को नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर (27 वर्ष) को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया।
आरोपी के पास से 5.085 किग्रा मेथामफेटामाइन , 5 मोबाइल फोन और 2 पासपोर्ट बरामद; नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार कीमत ₹10 करोड़ से अधिक ।
आरोपी 2023 में मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था और वीज़ा समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से रह रहा था।
फर्जी अमेरिकी-ब्रिटिश पहचान से फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप पर ठगी; लखनऊ के डालीगंज के एक युवक से कथित तौर पर ₹68 लाख की ठगी।
15 मई को गिरफ्तार साथी की पूछताछ से प्रॉस्पर की ड्रग तस्करी में संलिप्तता का खुलासा हुआ था।

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) ने नई दिल्ली से नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर (उम्र 27 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के ज़रिए भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक संगठित साइबर धोखाधड़ी रैकेट का संचालन कर रहा था। 19 जुलाई को की गई इस गिरफ्तारी में एसटीएफ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ संयुक्त अभियान चलाया और आरोपी के पास से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत ₹10 करोड़ से अधिक आँकी गई है।

कैसे चलाया जाता था रैकेट

एसटीएफ के अनुसार, ओबेस प्रॉस्पर खुद को अमेरिकी या ब्रिटिश नागरिक बताकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के ज़रिए भारत सहित अन्य देशों के युवाओं से दोस्ती करता था। एक बार विश्वास जीतने के बाद वह पीड़ितों को बताता था कि उनके लिए महँगे तोहफे या विदेशी मुद्रा वाले पार्सल भेजे जा रहे हैं।

इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को कस्टम अधिकारी या इनकम टैक्स विभाग का अफसर बताकर पीड़ितों से कहते थे कि पार्सल एयरपोर्ट पर जब्त हो गया है और उसे छुड़ाने के लिए टैक्स या शुल्क जमा करना होगा। इस तरीके से गिरोह ने कथित तौर पर पीड़ितों से लाखों रुपए ठगे।

लखनऊ के युवक से ₹68 लाख की ठगी

एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, एक मामले में आरोपी ने फेसबुक के ज़रिए लखनऊ के डालीगंज निवासी एक युवक से दोस्ती की और कथित तौर पर उससे ₹68 लाख की ठगी की। इस धोखाधड़ी में आरोपी के साथी उचेनवा ने भी सहयोग किया था। इस मामले में मदेहगंज पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

15 मई को एसटीएफ ने दिल्ली में प्रॉस्पर के एक साथी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। उस पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर यह सामने आया कि प्रॉस्पर ड्रग तस्करी में भी संलिप्त है। इसके बाद एसटीएफ और NCB ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे साउथ दिल्ली के राजू पार्क, मकान नंबर 2/10 से गिरफ्तार किया।

बरामदगी में 5.085 किग्रा मेथामफेटामाइन के अलावा पाँच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट भी शामिल हैं।

अवैध प्रवास और सिंडिकेट का खुलासा

पूछताछ में ओबेस प्रॉस्पर ने बताया कि वह 2023 में मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था, लेकिन वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह और उसके साथी अवैध रूप से देश में रह रहे थे। उसने स्वीकार किया कि इस सिंडिकेट में कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं जो फर्जी विदेशी पहचान अपनाकर ऑनलाइन ठगी करते थे।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों की संलिप्तता चिंता का विषय बनती जा रही है। एसटीएफ अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक बहुस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की परत उघाड़ती है जो साइबर ठगी और ड्रग तस्करी को एक साथ संचालित कर रहा था — जो अपने आप में असामान्य और चिंताजनक संयोजन है। मेडिकल वीज़ा की आड़ में प्रवेश और फिर वर्षों तक अवैध प्रवास यह सवाल उठाता है कि आव्रजन निगरानी तंत्र में कहाँ चूक हुई। लखनऊ के डालीगंज से लेकर दिल्ली तक फैले इस नेटवर्क से यह भी स्पष्ट है कि 'पार्सल स्कैम' जैसी पुरानी पड़ चुकी ठगी अभी भी लाखों रुपए वसूल रही है — जो डिजिटल साक्षरता की गंभीर कमी को उजागर करती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एसटीएफ ने किसे और कहाँ से गिरफ्तार किया?
यूपी एसटीएफ ने नाइजीरियाई नागरिक ओबेस प्रॉस्पर (27 वर्ष) को साउथ दिल्ली के राजू पार्क स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी एसटीएफ और NCB के संयुक्त अभियान में 19 जुलाई को हुई।
आरोपी के पास से क्या बरामद हुआ?
आरोपी के पास से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत ₹10 करोड़ से अधिक है। इसके अलावा पाँच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट भी ज़ब्त किए गए।
ओबेस प्रॉस्पर साइबर ठगी कैसे करता था?
आरोपी फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर खुद को अमेरिकी या ब्रिटिश नागरिक बताकर भारतीय युवाओं से दोस्ती करता था। इसके बाद पार्सल भेजने का झाँसा देकर, फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर पीड़ितों से टैक्स और शुल्क के नाम पर लाखों रुपए वसूले जाते थे।
लखनऊ के युवक से कितनी ठगी हुई?
एसटीएफ के अनुसार, आरोपी ने फेसबुक के ज़रिए लखनऊ के डालीगंज के एक युवक से दोस्ती कर कथित तौर पर ₹68 लाख की ठगी की। इस मामले में मदेहगंज पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज है।
आरोपी भारत में कैसे रह रहा था?
ओबेस प्रॉस्पर 2023 में मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था। वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह और उसके साथी अवैध रूप से देश में रह रहे थे। पूछताछ में उसने स्वयं यह स्वीकार किया।
राष्ट्र प्रेस
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