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सरगुजा में 90 वर्षीय सास को पीठ पर लादकर 3 किमी चली बहू, ₹500 पेंशन के लिए KYC की मजबूरी

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सरगुजा में 90 वर्षीय सास को पीठ पर लादकर 3 किमी चली बहू, ₹500 पेंशन के लिए KYC की मजबूरी

सारांश

₹500 की मासिक पेंशन के लिए सरगुजा की सुखमनिया को अपनी 90 वर्षीय सास को भीषण गर्मी में 3 किलोमीटर तक पीठ पर लादकर बैंक ले जाना पड़ा — KYC अधूरी होने से चार महीने से पेंशन बंद थी। वायरल वीडियो ने डिजिटल इंडिया के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को बेनकाब कर दिया।

मुख्य बातें

सुखमनिया को 23 मई 2026 को अपनी 90 वर्षीय सास को 3 किलोमीटर तक पीठ पर लादकर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मैनपाट ले जाना पड़ा।
बुजुर्ग महिला को पिछले 4 महीनों से ₹500 मासिक पेंशन नहीं मिली थी — कारण: KYC सत्यापन अधूरा ।
बैंक अधिकारियों ने कथित तौर पर पेंशनभोगी को स्वयं शाखा में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
राहगीर द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे व्यापक आक्रोश फैला।
घटना ने डोरस्टेप बैंकिंग और जीवन प्रमाण जैसी योजनाओं की ज़मीनी विफलता पर सवाल उठाए।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक मार्मिक घटना ने बुजुर्ग पेंशनभोगियों की दुर्दशा को उजागर किया है — जंगलपारा गाँव की निवासी सुखमनिया को अपनी 90 वर्षीय सास को भीषण गर्मी में लगभग 3 किलोमीटर तक पीठ पर लादकर मैनपाट स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा तक ले जाना पड़ा। यह घटना शुक्रवार, 23 मई 2026 को मैनपट विकास ब्लॉक में घटी, और एक राहगीर द्वारा बनाया गया वीडियो अगले दिन सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया।

क्या है पूरा मामला

सुखमनिया के अनुसार, उनकी सास को पिछले चार महीनों से ₹500 मासिक पेंशन नहीं मिल रही थी, क्योंकि उनकी KYC (Know Your Customer) सत्यापन प्रक्रिया अधूरी थी। बैंक अधिकारियों ने कथित तौर पर यह स्पष्ट कर दिया था कि औपचारिकता पूरी करने के लिए बुजुर्ग महिला को स्वयं शाखा में उपस्थित होना अनिवार्य है।

सुखमनिया ने बताया, 'मुझे पैसे नहीं मिल रहे थे, इसलिए मैं उन्हें वहाँ ले गई। मुझे उन्हें पीठ पर लादकर ले जाना पड़ा क्योंकि अन्यथा काम नहीं हो रहा था। बैंक अधिकारियों ने कहा कि मुझे उन्हें स्वयं लाना होगा; तभी काम पूरा होगा।' चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ बुजुर्ग सास के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर सुखमनिया ने यह कठिन रास्ता चुना।

वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर आक्रोश

एक राहगीर द्वारा बनाए गए वीडियो में सुखमनिया को झुलसती धूप में सास को पीठ पर उठाए चलते देखा जा सकता है। वीडियो देखकर कई लोगों को लोककथा 'विक्रम-बेताल' की याद आई, लेकिन यह कोई कहानी नहीं — दो महिलाओं का एक बुनियादी सरकारी योजना के लिए संघर्ष था।

सोशल मीडिया उपयोगकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि डिजिटल इंडिया और घर-घर सेवा वितरण के सरकारी दावों के बावजूद दूरदराज के इलाकों में रहने वाले चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्ग पेंशनभोगियों को सत्यापन के लिए शारीरिक रूप से बैंक क्यों आना पड़ रहा है।

व्यवस्था की खामियाँ उजागर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र और राज्य सरकारें बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए डोरस्टेप बैंकिंग और जीवन प्रमाण पत्र जैसी डिजिटल सुविधाओं का प्रचार-प्रसार कर रही हैं। गौरतलब है कि भारत सरकार की जीवन प्रमाण योजना के तहत बुजुर्ग पेंशनभोगी घर बैठे बायोमेट्रिक सत्यापन करा सकते हैं, फिर भी दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा अक्सर ज़मीनी स्तर पर नहीं पहुँच पाती।

सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल और पहाड़ी जिले में बुनियादी ढाँचे की कमी और बैंकिंग सेवाओं की सीमित पहुँच इस समस्या को और गहरा बना देती है। ₹500 की मामूली मासिक पेंशन के लिए किलोमीटरों की यात्रा — वह भी 90 वर्षीय बुजुर्ग को पीठ पर लादकर — यह दर्शाती है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के लाभार्थी तक पहुँचाने में अभी भी बड़ी खाई मौजूद है।

आगे क्या होगा

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और बैंक अधिकारियों पर दबाव बढ़ा है। इस मामले ने राज्य में बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए घर-घर KYC सत्यापन की माँग को नई ऊर्जा दी है। अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सामाजिक संगठनों ने इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो एक 90 वर्षीय महिला को ₹500 की पेंशन के लिए शारीरिक रूप से बैंक बुलाना उस दावे की सीधी काट है। असली सवाल यह नहीं कि सुखमनिया ने क्या किया — असली सवाल यह है कि चार महीने तक किसी अधिकारी ने यह क्यों नहीं सुनिश्चित किया कि एक अशक्त बुजुर्ग को उसका हक घर पर मिले। जब तक कल्याणकारी योजनाओं की 'लास्ट माइल डिलीवरी' की जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसे वीडियो बनते रहेंगे और आक्रोश ठंडा पड़ता रहेगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ में सास को पीठ पर लादकर बैंक ले जाने की घटना क्या है?
सरगुजा जिले के जंगलपारा गाँव की सुखमनिया को अपनी 90 वर्षीय सास को भीषण गर्मी में लगभग 3 किलोमीटर तक पीठ पर लादकर मैनपाट स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा तक ले जाना पड़ा। बैंक अधिकारियों ने KYC सत्यापन के लिए बुजुर्ग महिला की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य बताई थी।
पेंशन क्यों रुकी हुई थी?
रिपोर्टों के अनुसार, बुजुर्ग महिला की KYC (Know Your Customer) सत्यापन प्रक्रिया अधूरी थी, जिसके कारण पिछले चार महीनों से उनकी ₹500 मासिक पेंशन रोक दी गई थी। बैंक ने सत्यापन के लिए उनकी शारीरिक उपस्थिति की शर्त रखी थी।
क्या बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए घर पर KYC की कोई सरकारी सुविधा नहीं है?
केंद्र सरकार की 'जीवन प्रमाण' योजना के तहत बुजुर्ग पेंशनभोगी घर बैठे बायोमेट्रिक सत्यापन करा सकते हैं और 'डोरस्टेप बैंकिंग' की सुविधा भी उपलब्ध है। हालाँकि, सरगुजा जैसे दूरदराज और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यह सुविधा ज़मीनी स्तर पर अक्सर उपलब्ध नहीं हो पाती।
इस घटना पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
राहगीर द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक आक्रोश फैला। उपयोगकर्ताओं ने सरकारी कल्याण योजनाओं की ज़मीनी विफलता और दूरदराज के बुजुर्ग पेंशनभोगियों की दुर्दशा पर सवाल उठाए।
इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और बैंक अधिकारियों पर दबाव बढ़ा है। सामाजिक संगठनों ने बुजुर्ग और अशक्त पेंशनभोगियों के लिए अनिवार्य घर-घर KYC सत्यापन की माँग की है, हालाँकि अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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