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मेघालय: शिलांग के एमबोस हॉस्टल को डिपोर्टेशन का इंतजार कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर घोषित

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मेघालय: शिलांग के एमबोस हॉस्टल को डिपोर्टेशन का इंतजार कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर घोषित

सारांश

मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट के दबाव में शिलांग के एमबोस हॉस्टल को 60-बेड के डिटेंशन सेंटर में तब्दील किया है। पाँच साल से अधिक समय से हिरासत में बंद विदेशी नागरिकों के मुआवजे पर भी सवाल उठे हैं। अगली सुनवाई 28 सितंबर को।

मुख्य बातें

मेघालय सरकार ने 17 सितंबर 2026 को शिलांग के एमबोस हॉस्टल को विदेशी नागरिकों के लिए अस्थायी होल्डिंग सेंटर अधिसूचित किया।
सुविधा में 6 डॉर्मिटरी और 60 बेड की क्षमता; 26 सीसीटीवी कैमरे और मेडिकल स्टाफ की व्यवस्था।
मेघालय उच्च न्यायालय ने 30 विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर 2026 तक नए केंद्र में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
कथित तौर पर 5 साल से अधिक समय से हिरासत में बंद 5 विदेशी नागरिकों — जिनमें म्यांमार, नाइजीरिया और बांग्लादेश के नागरिक शामिल — के मुआवजे पर रिकॉर्ड तलब।
4 मामलों में डिपोर्टेशन आदेश जारी; अधिकारी वापसी की प्रक्रिया में।
अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को, जब ट्रांसफर की स्थिति की समीक्षा होगी।

मेघालय सरकार ने शिलांग के लाइटुमखरा इलाके में स्थित एमबोस (MBOSE) हॉस्टल को विदेशी नागरिकों के लिए अस्थायी डिटेंशन एवं होल्डिंग सेंटर के रूप में अधिसूचित किया है। यहाँ उन विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा जो अपनी जेल की सज़ा पूरी कर चुके हैं लेकिन डिपोर्टेशन की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। गृह (राजनीतिक) विभाग ने 17 सितंबर 2026 को यह अधिसूचना जारी की।

पृष्ठभूमि और न्यायिक हस्तक्षेप

यह कदम मेघालय उच्च न्यायालय में चल रहे एक स्वतः संज्ञान मामले के तहत उठाया गया है। मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगडोह की खंडपीठ राज्य की जेलों में विदेशी नागरिकों की लंबी हिरासत के मामले की जाँच कर रही है। गौरतलब है कि इससे पहले उच्च न्यायालय ने नोंगस्टोइन में एक इमारत को इस उद्देश्य के लिए उपयोग करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसके बाद वर्तमान समाधान सामने आया।

न्यायालय का निर्देश और समयसीमा

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार को 30 विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर 2026 तक नई अधिसूचित सुविधा में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। बेंच ने अपने आदेश में कहा, 'चूँकि सभी सुविधाएँ लगभग तैयार हैं, हम निर्देश देते हैं कि सभी विदेशी नागरिकों को जल्द से जल्द और किसी भी हालत में 28 सितंबर तक एमबोस हॉस्टल के अस्थायी डिटेंशन सेंटर में ट्रांसफर किया जाए।' इस निर्देश के बाद जेल और सुधार सेवा के महानिरीक्षक ने सभी जिला जेलों के अधिकारियों को स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

सुविधा की संरचना और क्षमता

न्यायालय में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, एमबोस हॉस्टल एक ग्राउंड प्लस दो मंजिला इमारत है, जिसमें 6 डॉर्मिटरी और कुल 60 बेड की क्षमता है। इस केंद्र में 26 प्रशासनिक एवं गार्डिंग कर्मचारी, 8 सुरक्षाकर्मी और प्रवेश द्वार व वॉचटावरों पर एक प्लाटून तैनात करने का प्रस्ताव है। सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत 26 सीसीटीवी कैमरे और अग्नि सुरक्षा उपकरण भी स्थापित किए गए हैं। मेडिकल सुविधाओं में एक मेडिकल ऑफिसर और तीन सहायक मेडिकल कर्मचारी शामिल हैं।

लंबे समय से हिरासत में बंद नागरिकों का मामला

21 सितंबर 2026 की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि 4 मामलों में डिपोर्टेशन के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं और संबंधित अधिकारी इन्हें उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया में हैं। इस सुनवाई में कथित तौर पर 5 साल से अधिक समय से हिरासत में रह रहे 5 विदेशी नागरिकों के मामले पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनमें 2 म्यांमार के नागरिक, 2 नाइजीरियाई और 1 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। खंडपीठ ने राज्य सरकार और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को उन नागरिकों को मुआवजा देने की संभावना पर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है जो अपनी जेल की सज़ा से अधिक समय तक हिरासत में रहे हैं।

आगे क्या

इस मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होनी है, जब उच्च न्यायालय स्थानांतरण और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया की स्थिति की समीक्षा करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अवैध प्रवासियों और विदेशी नागरिकों की हिरासत एवं डिपोर्टेशन को लेकर न्यायिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अनदेखे संकट की ओर इशारा करता है — वे विदेशी नागरिक जो सज़ा पूरी कर चुके हैं, लेकिन राजनयिक और प्रशासनिक अड़चनों के कारण जेलों में पड़े हैं। पाँच साल से अधिक की कथित हिरासत और मुआवजे पर अदालत का रुख स्पष्ट करता है कि यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मानवाधिकार का सवाल भी है। FRRO और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी एक पुरानी समस्या है जो इस मामले में फिर उजागर हुई है। केंद्र और राज्य को मिलकर एक स्पष्ट डिपोर्टेशन समयसीमा तंत्र बनाना होगा, वरना होल्डिंग सेंटर भी एक और लंबी हिरासत की जगह बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय में विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर क्यों बनाया गया?
मेघालय उच्च न्यायालय के स्वतः संज्ञान मामले में राज्य की जेलों में विदेशी नागरिकों की लंबी हिरासत उजागर होने के बाद यह केंद्र बनाया गया। इन नागरिकों ने अपनी जेल की सज़ा पूरी कर ली है लेकिन डिपोर्टेशन की प्रक्रिया लंबित होने के कारण अभी तक हिरासत में हैं।
एमबोस होल्डिंग सेंटर में कितनी क्षमता है?
शिलांग के लाइटुमखरा स्थित एमबोस हॉस्टल एक ग्राउंड प्लस दो मंजिला इमारत है जिसमें 6 डॉर्मिटरी और 60 बेड की क्षमता है। यहाँ 26 प्रशासनिक और गार्डिंग कर्मचारी, 8 सुरक्षाकर्मी, 26 सीसीटीवी कैमरे और एक मेडिकल टीम की भी व्यवस्था की गई है।
मेघालय हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिया?
मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगडोह की खंडपीठ ने राज्य सरकार को 30 विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर 2026 तक एमबोस होल्डिंग सेंटर में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई उसी तारीख को होगी।
किन विदेशी नागरिकों को मुआवजे का मामला उठाया गया?
कथित तौर पर 5 साल से अधिक समय से हिरासत में बंद 5 विदेशी नागरिकों के मामले में अदालत ने ध्यान दिया — जिनमें 2 म्यांमार के, 2 नाइजीरियाई और 1 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। खंडपीठ ने राज्य सरकार और FRRO को उन नागरिकों को संभावित मुआवजे पर रिकॉर्ड पेश करने को कहा है जो सज़ा से अधिक समय तक हिरासत में रहे।
नोंगस्टोइन वाले प्रस्ताव को क्यों खारिज किया गया था?
मेघालय उच्च न्यायालय ने नोंगस्टोइन में एक इमारत को विदेशी नागरिकों की हिरासत के लिए उपयोग करने के राज्य सरकार के पहले के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद शिलांग के एमबोस हॉस्टल को अधिसूचित करने का निर्णय लिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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