मेघालय: शिलांग के एमबोस हॉस्टल को डिपोर्टेशन का इंतजार कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर घोषित
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय सरकार ने शिलांग के लाइटुमखरा इलाके में स्थित एमबोस (MBOSE) हॉस्टल को विदेशी नागरिकों के लिए अस्थायी डिटेंशन एवं होल्डिंग सेंटर के रूप में अधिसूचित किया है। यहाँ उन विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा जो अपनी जेल की सज़ा पूरी कर चुके हैं लेकिन डिपोर्टेशन की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। गृह (राजनीतिक) विभाग ने 17 सितंबर 2026 को यह अधिसूचना जारी की।
पृष्ठभूमि और न्यायिक हस्तक्षेप
यह कदम मेघालय उच्च न्यायालय में चल रहे एक स्वतः संज्ञान मामले के तहत उठाया गया है। मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगडोह की खंडपीठ राज्य की जेलों में विदेशी नागरिकों की लंबी हिरासत के मामले की जाँच कर रही है। गौरतलब है कि इससे पहले उच्च न्यायालय ने नोंगस्टोइन में एक इमारत को इस उद्देश्य के लिए उपयोग करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसके बाद वर्तमान समाधान सामने आया।
न्यायालय का निर्देश और समयसीमा
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार को 30 विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर 2026 तक नई अधिसूचित सुविधा में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। बेंच ने अपने आदेश में कहा, 'चूँकि सभी सुविधाएँ लगभग तैयार हैं, हम निर्देश देते हैं कि सभी विदेशी नागरिकों को जल्द से जल्द और किसी भी हालत में 28 सितंबर तक एमबोस हॉस्टल के अस्थायी डिटेंशन सेंटर में ट्रांसफर किया जाए।' इस निर्देश के बाद जेल और सुधार सेवा के महानिरीक्षक ने सभी जिला जेलों के अधिकारियों को स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
सुविधा की संरचना और क्षमता
न्यायालय में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, एमबोस हॉस्टल एक ग्राउंड प्लस दो मंजिला इमारत है, जिसमें 6 डॉर्मिटरी और कुल 60 बेड की क्षमता है। इस केंद्र में 26 प्रशासनिक एवं गार्डिंग कर्मचारी, 8 सुरक्षाकर्मी और प्रवेश द्वार व वॉचटावरों पर एक प्लाटून तैनात करने का प्रस्ताव है। सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत 26 सीसीटीवी कैमरे और अग्नि सुरक्षा उपकरण भी स्थापित किए गए हैं। मेडिकल सुविधाओं में एक मेडिकल ऑफिसर और तीन सहायक मेडिकल कर्मचारी शामिल हैं।
लंबे समय से हिरासत में बंद नागरिकों का मामला
21 सितंबर 2026 की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि 4 मामलों में डिपोर्टेशन के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं और संबंधित अधिकारी इन्हें उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया में हैं। इस सुनवाई में कथित तौर पर 5 साल से अधिक समय से हिरासत में रह रहे 5 विदेशी नागरिकों के मामले पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनमें 2 म्यांमार के नागरिक, 2 नाइजीरियाई और 1 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। खंडपीठ ने राज्य सरकार और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को उन नागरिकों को मुआवजा देने की संभावना पर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है जो अपनी जेल की सज़ा से अधिक समय तक हिरासत में रहे हैं।
आगे क्या
इस मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होनी है, जब उच्च न्यायालय स्थानांतरण और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया की स्थिति की समीक्षा करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अवैध प्रवासियों और विदेशी नागरिकों की हिरासत एवं डिपोर्टेशन को लेकर न्यायिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ता जा रहा है।