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नेपाल बाढ़ त्रासदी: शव परिजनों को सौंपने से पहले DNA, पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच अनिवार्य, भारतीय दूतावास ने जारी की गाइडलाइन

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नेपाल बाढ़ त्रासदी: शव परिजनों को सौंपने से पहले DNA, पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच अनिवार्य, भारतीय दूतावास ने जारी की गाइडलाइन

सारांश

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने शव सुपुर्दगी की अनिवार्य प्रक्रिया जारी की है — DNA मिलान, पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के बिना कोई भी पार्थिव अवशेष परिजनों को नहीं सौंपा जाएगा। अस्थायी रूप से दफनाए गए शवों के लिए DNA मिलान ही एकमात्र विकल्प है।

मुख्य बातें

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने 1 सितंबर 2026 को नेपाल बाढ़ पीड़ितों के शव सुपुर्दगी की विस्तृत गाइडलाइन जारी की।
शव सौंपने से पहले पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच, DNA सैंपलिंग और पासपोर्ट/आईडी सत्यापन अनिवार्य।
स्वास्थ्य जोखिम के चलते बड़ी संख्या में शव अस्थायी रूप से दफनाए गए; पहचान के लिए फर्स्ट-डिग्री रिलेटिव्स का DNA मिलान जरूरी।
परिजन DNA प्रोफाइल eoikathmandufloodsupport@gmail.com पर भेज सकते हैं या ब्लड सैंपल दे सकते हैं।
दूतावास हेल्पलाइन नंबर: 9779851316807 , 9779709107500 , 9779810326117 ; नेपाल पुलिस हेल्पलाइन: 9779841616095 ।

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने 1 सितंबर 2026 को नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में मारे गए विदेशी नागरिकों के पार्थिव अवशेषों की सुपुर्दगी को लेकर एक विस्तृत प्रक्रिया-दिशानिर्देश जारी किया है। नेपाली अधिकारियों के अनुसार, किसी भी शव को परिजनों या संबंधित अधिकारियों को सौंपने से पहले दस्तावेजीकरण, पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच, DNA सैंपलिंग और पहचान सत्यापन की अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। यह अपडेट 29 अगस्त को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति की अगली कड़ी है।

शव सुपुर्दगी की औपचारिक प्रक्रिया

नेपाल सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत पार्थिव अवशेषों से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज तैयार किए जाएंगे। इसमें शव की रिकॉर्ड की गई तस्वीरें और विवरण, पोस्टमॉर्टम जांच, मौत का कारण सत्यापित करना, औपचारिक पहचान स्थापित करना, फिंगरप्रिंट, DNA और फॉरेंसिक सैंपल इकट्ठा करना, मृतक का पासपोर्ट/आईडी सत्यापित करना और दूतावास-काउंसलर समन्वय शामिल है। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही पार्थिव अवशेष संबंधित पक्ष को सौंपे जाएंगे।

DNA मिलान की व्यवस्था

स्वास्थ्य जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफनाया है। ऐसे मामलों में पहचान के लिए फर्स्ट-डिग्री रिलेटिव्स (करीबी रिश्तेदारों) के साथ DNA मिलान अनिवार्य होगा। नेपाल में अधिकारी DNA प्रोफाइल बनाने के लिए शवों से सैंपल इकट्ठा कर रहे हैं। मृतक के करीबी रिश्तेदार ईमेल के माध्यम से अपनी DNA प्रोफाइल भेज सकते हैं या नेपाली अधिकारियों की मांग पर ब्लड सैंपल दे सकते हैं।

भारतीय दूतावास की सहायता और संपर्क

यदि परिजन नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और विवरण के आधार पर शव की पहचान कर पाते हैं, तो काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास शव सुपुर्दगी और स्वदेश वापसी की प्रक्रियाओं में स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में सहायता करेगा। करीबी रिश्तेदारों की DNA प्रोफाइल की कॉपी दूतावास के ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com पर भेजी जा सकती है।

DNA प्रोफाइलिंग से जुड़ी जानकारी नेपाल पुलिस की वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर 9779841616095 पर उपलब्ध है। किसी भी अतिरिक्त सहायता के लिए भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन नंबर 9779851316807, 9779709107500 और 9779810326117 पर संपर्क किया जा सकता है।

आम जनता पर असर

यह गाइडलाइन उन सभी भारतीय परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके प्रियजन नेपाल की इस त्रासदी में लापता हैं या जिनके शवों की अभी पहचान नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शव अस्थायी रूप से दफनाए जाने के कारण DNA मिलान ही पहचान का एकमात्र विश्वसनीय माध्यम बचा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है, इसलिए परिजनों को जल्द से जल्द दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

आगे की प्रक्रिया

दूतावास ने स्पष्ट किया है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही पार्थिव अवशेष सुपुर्द किए जाएंगे। परिजनों से अनुरोध है कि वे नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट देखते रहें और दूतावास की हेल्पलाइन से संपर्क में बने रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतनी ही समय-साध्य भी — और यही वह बिंदु है जिस पर सरकारी तंत्र की असली परीक्षा होगी। अस्थायी दफन और DNA मिलान की अनिवार्यता व्यावहारिक रूप से सही है, लेकिन ग्रामीण या दूरस्थ क्षेत्रों के परिजनों के लिए ब्लड सैंपल देने की प्रक्रिया तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बन सकती है। दूतावास की हेल्पलाइन और ईमेल सुविधा सराहनीय कदम है, परंतु यह सुनिश्चित करना होगा कि जानकारी हिंदी-भाषी और कम पढ़े-लिखे परिवारों तक भी प्रभावी ढंग से पहुंचे। आपदा कूटनीति की सफलता केवल गाइडलाइन जारी करने से नहीं, बल्कि उसके जमीनी क्रियान्वयन की गति से मापी जाएगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में मारे गए विदेशी नागरिकों के शव परिजनों को कैसे सौंपे जाएंगे?
नेपाल सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, शव सौंपने से पहले दस्तावेजीकरण, पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच, DNA सैंपलिंग और पासपोर्ट/आईडी सत्यापन की अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही पार्थिव अवशेष संबंधित परिजनों को सौंपे जाएंगे।
जिन शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है, उनकी पहचान कैसे होगी?
ऐसे मामलों में नेपाल सरकार DNA मिलान की सुविधा प्रदान करेगी। मृतक के फर्स्ट-डिग्री रिलेटिव्स (करीबी रिश्तेदार) अपनी DNA प्रोफाइल ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं या नेपाली अधिकारियों को ब्लड सैंपल दे सकते हैं।
भारतीय परिजन DNA प्रोफाइल कहां और कैसे भेज सकते हैं?
करीबी रिश्तेदार अपनी DNA प्रोफाइल की कॉपी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com पर भेज सकते हैं। DNA प्रोफाइलिंग की जानकारी नेपाल पुलिस की वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर 9779841616095 पर भी उपलब्ध है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन नंबर क्या हैं?
भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन नंबर 9779851316807, 9779709107500 और 9779810326117 हैं। इन नंबरों पर शव सुपुर्दगी, DNA प्रक्रिया और अन्य सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता है।
क्या परिजन नेपाल पुलिस की वेबसाइट से शव की पहचान कर सकते हैं?
हां, नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर मृतकों की तस्वीरें और विवरण उपलब्ध हैं। यदि परिजन इनके माध्यम से पहचान कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास शव सुपुर्दगी और स्वदेश वापसी की प्रक्रियाओं में स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में सहायता करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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