29 अक्टूबर 2026
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सूरत साइबर पुलिस का बड़ा एक्शन: वजन घटाने-त्वचा इलाज के नाम पर देशव्यापी ठगी में 5 गिरफ्तार, ₹21 करोड़ से अधिक के लेनदेन उजागर

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सूरत साइबर पुलिस का बड़ा एक्शन: वजन घटाने-त्वचा इलाज के नाम पर देशव्यापी ठगी में 5 गिरफ्तार, ₹21 करोड़ से अधिक के लेनदेन उजागर

सारांश

वजन और त्वचा की चिंता को हथियार बनाकर देशभर की महिलाओं को ठगने वाला यह रैकेट सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं — चार फर्मों, एक गुरुग्राम कॉल सेंटर और 160 से अधिक कर्मचारियों का तंत्र है। ₹21 करोड़ से अधिक का लेनदेन और नकली कूरियर कर्मचारियों की चाल इसे साइबर ठगी का एक खतरनाक नया मॉडल बनाती है।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम ब्रांच ने 29 अक्टूबर 2026 को वजन घटाने और त्वचा इलाज के नाम पर ठगने वाले रैकेट के 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' और 'ग्लोजेनिक स्किन केयर' के डायरेक्टर अमित गौरव , डायरेक्टर पंकज , पार्टनर रूपेश कुमार व पुनीत कुमार और मैनेजर दीपक कुमार शामिल हैं।
कंपनी के IDFC फर्स्ट बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और रेजरपे खातों में मिलाकर ₹21.87 करोड़ से अधिक का लेनदेन उजागर हुआ।
रैकेट में गुरुग्राम स्थित कॉल सेंटर में कथित तौर पर लगभग 160 कर्मचारी कार्यरत थे।
आरोपी सोशल मीडिया विज्ञापन और व्हाट्सएप पर फर्जी डॉक्टर बनकर महिलाओं को निशाना बनाते थे और नकली कूरियर कर्मचारियों के ज़रिए नकद वसूलते थे।
इससे पहले एक अन्य पीड़ित महिला के मामले में कंपनी पर ₹1.77 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप भी दर्ज है।

सूरत शहर पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने वजन घटाने और त्वचा उपचार के नाम पर देशभर की महिलाओं को ठगने वाले एक संगठित रैकेट का 29 अक्टूबर 2026 को भंडाफोड़ किया और पाँच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इस रैकेट से जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों एवं डिजिटल पेमेंट गेटवे में ₹21 करोड़ से अधिक के लेनदेन दर्ज हुए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले की शुरुआत एक महिला की शिकायत से हुई, जिसमें उसने बताया कि व्हाट्सएप पर 'डॉ. आकाश मल्होत्रा' बनकर किसी व्यक्ति ने उससे त्वचा की समस्याओं के बारे में जानकारी ली और 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' के क्यूआर कोड पर ₹8,000 ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए। भुगतान करने के बाद महिला को त्वचा की दवाओं के बजाय वजन घटाने का उत्पाद भेज दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने उससे त्वचा दवाओं के नाम पर ₹9,000 अतिरिक्त वसूल लिए, जबकि पहले के ₹8,000 भी नहीं लौटाए गए। सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई।

रैकेट का तरीका और विस्तार

जाँच में पता चला कि आरोपी 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस', 'वैदिक वर्ल्ड', 'दिव्या अंतरा वेलनेस एलएलपी' और 'ग्लोजेनिक स्किन केयर' जैसी एकाधिक कंपनियों की आड़ में काम करते थे। ये सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर ग्राहकों को उत्पाद की प्रभावशीलता का झूठा आश्वासन देते थे।

पुलिस के अनुसार, ग्राहकों को बताया जाता था कि डिलीवरी मानक कूरियर कंपनियों के ज़रिए होगी, लेकिन वास्तव में कंपनी के अपने कर्मचारियों को दिल्ली से हवाई जहाज या ट्रेन के ज़रिए भेजा जाता था। वे कूरियर कर्मचारियों का भेष धरकर ग्राहकों के दरवाज़े पर पहुँचते और नकद भुगतान वसूलते थे।

कॉल सेंटर पर छापा और गिरफ्तारी

तकनीकी जाँच के बाद पुलिस ने पहले सूरत में जाल बिछाकर 'राहुल राज' के नाम से काम करने वाले एक कूरियर कर्मचारी को पकड़ा। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस हरियाणा के गुरुग्राम स्थित कंपनी के कॉल सेंटर तक पहुँची और छापा मारा। बताया जा रहा है कि इस केंद्र में लगभग 160 लोग कार्यरत थे, जिनमें टेली-कॉलर, सलाहकार और कूरियर कर्मचारी शामिल थे।

गिरफ्तार पाँच आरोपियों की पहचान इस प्रकार है: 31 वर्षीय अमित गौरव, जो 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' और 'ग्लोजेनिक स्किन केयर' के डायरेक्टर हैं; 30 वर्षीय पंकज, जो 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' और 'दिव्या अंतरा वेलनेस एलएलपी' के डायरेक्टर हैं; 43 वर्षीय रूपेश कुमार और 43 वर्षीय पुनीत कुमार, दोनों 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' में पार्टनर; तथा 24 वर्षीय दीपक कुमार, जो कंपनी में मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। ये आरोपी दिल्ली, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जबकि पुनीत कुमार मूलतः पंजाब के हैं।

आर्थिक घोटाले का दायरा

जाँच में सामने आया कि इन कंपनियों के विभिन्न बैंक खातों में बड़े पैमाने पर लेनदेन हुआ। पुलिस के अनुसार, 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' के IDFC फर्स्ट बैंक खाते में 1 जनवरी से 29 जून 2026 के बीच ₹6.99 करोड़ जमा हुए। इसी कंपनी के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में 7 अप्रैल 2025 से 29 जून 2026 के बीच ₹6.58 करोड़ आए। इसके अलावा रेजरपे मर्चेंट अकाउंट के ज़रिए ₹8.30 करोड़ का लेनदेन दर्ज किया गया।

गौरतलब है कि जाँच में 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' द्वारा सूरत की एक अन्य महिला के साथ कथित तौर पर ₹1,77,40,500 (लगभग ₹1.77 करोड़) की पूर्व धोखाधड़ी का भी खुलासा हुआ।

आगे की जाँच और कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि पिछले संबंधित मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन इस पूरे रैकेट के मुख्य सूत्रधार उस बार बचने में सफल रहे थे। अब पाँच और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ जाँच का दायरा और विस्तृत हो गया है। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में और अभियुक्तों की तलाश जारी है तथा रैकेट के पूरे नेटवर्क का खुलासा करना अभी भी जाँच का प्रमुख उद्देश्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

160 कर्मचारियों का ढाँचा और नकली कूरियर नेटवर्क यह दर्शाते हैं कि यह सुनियोजित कॉर्पोरेट धोखाधड़ी थी, न कि छुटपुट साइबर अपराध। मुख्यधारा की कवरेज गिरफ्तारियों पर रुक जाती है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पेमेंट गेटवे ऐसे विज्ञापनों व लेनदेन पर नज़र रखने में विफल रहे, और उनकी जवाबदेही कब तय होगी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत में वजन घटाने और त्वचा इलाज की ठगी का मामला क्या है?
सूरत साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है जिसमें 'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' समेत चार कंपनियाँ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के ज़रिए महिलाओं को वजन घटाने व त्वचा उपचार के नाम पर ठग रही थीं। 29 अक्टूबर 2026 को पाँच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और विभिन्न बैंक खातों में ₹21 करोड़ से अधिक के लेनदेन उजागर हुए।
गिरफ्तार किए गए पाँच आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में 31 वर्षीय अमित गौरव ('क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' व 'ग्लोजेनिक स्किन केयर' के डायरेक्टर), 30 वर्षीय पंकज ('क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' व 'दिव्या अंतरा वेलनेस एलएलपी' के डायरेक्टर), 43 वर्षीय रूपेश कुमार, 43 वर्षीय पुनीत कुमार (दोनों पार्टनर) और 24 वर्षीय दीपक कुमार (मैनेजर) शामिल हैं।
इन कंपनियों ने ठगी कैसे अंजाम दी?
आरोपी सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देते थे और व्हाट्सएप पर फर्जी डॉक्टर बनकर महिलाओं से ऑनलाइन भुगतान कराते थे। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों को कूरियर कर्मचारी के भेष में भेजकर नकद वसूली की जाती थी, जबकि ग्राहकों को गलत या घटिया उत्पाद दिए जाते थे।
इस रैकेट में कितने पैसों का लेनदेन हुआ?
'क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस' के IDFC फर्स्ट बैंक खाते में ₹6.99 करोड़, कोटक महिंद्रा बैंक खाते में ₹6.58 करोड़ और रेजरपे मर्चेंट अकाउंट के ज़रिए ₹8.30 करोड़ — यानी कुल मिलाकर ₹21 करोड़ से अधिक का लेनदेन पुलिस जाँच में उजागर हुआ है।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ होंगी?
पुलिस के अनुसार जाँच अभी जारी है और रैकेट के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। इससे पहले एक संबंधित मामले में चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके थे, लेकिन मुख्य सूत्रधार तब बच निकले थे, जो अब पकड़ में आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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