वारी एनर्जीज के शेयर 5.7% टूटे: अमेरिकी कस्टम जांच की खबरों के बाद कंपनी ने दी सफाई
सारांश
मुख्य बातें
वारी एनर्जीज के शेयर सोमवार, 29 जून को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 5.7 प्रतिशत से अधिक गिरकर ₹2,836 के दिन के निचले स्तर पर आ गए। यह गिरावट उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिकी कस्टम अधिकारी कंपनी के सोलर मॉड्यूल निर्यात की जांच कर रहे हैं। कंपनी ने स्पष्टीकरण जारी करने के बावजूद बाज़ार में बिकवाली का दबाव बना रहा।
क्या है पूरा मामला
रिपोर्टों में आरोप लगाया गया था कि वारी एनर्जीज ने चीन में निर्मित सोलर सेल का उपयोग कर उन्हें भारत में बने मॉड्यूल के रूप में अमेरिका निर्यात किया। यदि यह साबित होता, तो इससे कंपनी के ग्राहकों को चीनी उत्पादों पर लागू अधिक आयात शुल्क से बचने का अनुचित लाभ मिल सकता था। हालाँकि, कंपनी ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है।
कंपनी का स्पष्टीकरण
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, 'अमेरिका में हमारा कारोबार पूरी तरह सामान्य तरीके से चल रहा है। विनिर्माण, ग्राहकों को डिलीवरी या व्यावसायिक संचालन पर इस मामले का कोई प्रभाव नहीं है।' कंपनी के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों को गलत तरीके से समझा गया है और जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।
वारी एनर्जीज ने यह भी बताया कि अमेरिकी कस्टम अधिकारियों ने भारत स्थित उसके विनिर्माण संयंत्र का निरीक्षण किया और पुष्टि की कि जांच के दायरे में आने वाले शिपमेंट में किसी भी चीनी मूल के सोलर सेल का उपयोग नहीं हुआ था। कंपनी के अनुसार, अधिकारियों ने उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला है और न ही किसी गड़बड़ी का दोषी ठहराया है।
जांच की सीमा और दायरा
कंपनी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कस्टम की यह समीक्षा केवल कुछ पुराने आयात शिपमेंट तक सीमित है और इसका उसके संपूर्ण अमेरिकी कारोबार या कुल निर्यात गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके किसी भी आयात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया है।
शेयर का दीर्घकालिक प्रदर्शन
गौरतलब है कि वारी एनर्जीज के शेयर पिछले एक महीने में 9 प्रतिशत से अधिक, पिछले 6 महीने में 4 प्रतिशत से अधिक और पिछले एक वर्ष में करीब 9 प्रतिशत तक गिर चुके हैं। NSE पर कंपनी का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹3,865 और 52 सप्ताह का निचला स्तर ₹2,403 है। कंपनी का मार्केट कैप फिलहाल ₹81,720 करोड़ है।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र वैश्विक व्यापार तनावों और अमेरिकी आयात नीतियों की कड़ी निगरानी में है। जांच के अंतिम परिणाम और अमेरिकी कस्टम की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने तक बाज़ार में अनिश्चितता बनी रह सकती है।