कैलाश खेर ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुए शामिल
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक कैलाश खेर ने 6 जून 2025 को मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन पहुँचकर बाबा महाकालेश्वर के दरबार में शीश नवाया और प्रातःकालीन भस्म आरती में भाग लिया। दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने अपनी शिवभक्ति और सनातन संस्कृति के प्रति गहरी आस्था खुलकर व्यक्त की।
महाकाल दर्शन पर कैलाश खेर के उद्गार
बाबा महाकाल के दर्शन के बाद कैलाश खेर ने कहा कि महाकाल के प्रांगण में आना जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य प्राप्त करने जैसा अनुभव है। उन्होंने कहा, 'इस पवित्र भारत भूमि और सनातन परंपराओं के निर्वहन में जुटे लोगों को मैं प्रणाम करता हूँ। इस धरती पर जन्म लेना ही किसी सौभाग्य से कम नहीं है।' उनके अनुसार परमात्मा दिशाविहीन लोगों को राह दिखाने के लिए ही बार-बार अपने चरणों में बुलाते हैं।
अवंतिका नगरी का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व
कैलाश खेर ने उज्जयिनी (अवंतिका नगरी) को पूरे ब्रह्मांड और मानव जीवन परंपराओं का जीवंत अभिलेख बताया। उन्होंने कहा, 'पहले कर्क रेखा भी यहीं से गुजरती थी, लेकिन समय बदला गया और कर्क रेखा यूरोप के पास चली गई। पहले विक्रम संवत से ही विश्व चलता था, लेकिन भारत अभी भी अपनी धारणाओं, विचारों और परंपराओं पर अडिग है। धीरे-धीरे वक्त बदल रहा है और अब समय भारत का ही है।'
तीर्थयात्राओं का सिलसिला
यह यात्रा एकाकी नहीं है — कैलाश खेर हाल के हफ्तों में कई प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा कर चुके हैं। 27 मई को वे बद्रीनाथ धाम पहुँचे और भगवान विष्णु का आशीर्वाद लिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बद्रीनाथ यात्रा की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे रुद्राक्ष की माला और माथे पर चंदन का तिलक लगाए, बर्फ से ढके पहाड़ों की पृष्ठभूमि में मुस्कुराते नजर आए। इससे पहले वे केदारनाथ धाम भी पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने मंदिर के सामने खड़े होकर अपना प्रसिद्ध भक्ति गीत 'बम लहरी' गाया और उसका वीडियो भी साझा किया। उस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा था, 'महादेव का धाम, पूरे सारे काम। जय जय केदार।'
नया गाना 'जोगी' और आध्यात्मिक संदेश
कैलाश खेर इन दिनों अपने नए गाने 'जोगी' को लेकर भी चर्चा में हैं, जो आदि शंकराचार्य को समर्पित है। इस गाने के बारे में उन्होंने कहा था कि सदियों से संतों और ऋषियों ने जिस आध्यात्मिक भावना को महसूस किया, वही भावना इस संगीत में भी है। उनके अनुसार आदि शंकराचार्य का संदेश आज भी लोगों को सच और धर्म के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। यह तीर्थयात्राओं की श्रृंखला और उनकी संगीत यात्रा दोनों मिलकर उनकी गहरी आध्यात्मिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।