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कैलाश खेर ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुए शामिल

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कैलाश खेर ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुए शामिल

सारांश

गायक कैलाश खेर की आध्यात्मिक यात्राओं का सिलसिला जारी है — केदारनाथ और बद्रीनाथ के बाद अब उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में भस्म आरती और दर्शन। साथ में आदि शंकराचार्य को समर्पित नया गाना 'जोगी' — भक्ति और संगीत का अनूठा संगम।

मुख्य बातें

कैलाश खेर ने 6 जून 2025 को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए और भस्म आरती में भाग लिया।
उन्होंने 27 मई को बद्रीनाथ धाम और उससे पहले केदारनाथ धाम की भी यात्रा की थी।
केदारनाथ में उन्होंने मंदिर के सामने अपना प्रसिद्ध भक्ति गीत 'बम लहरी' गाया था।
उनका नया गाना 'जोगी' आदि शंकराचार्य को समर्पित है और आध्यात्मिक भावना से ओतप्रोत है।
कैलाश खेर ने उज्जयिनी को ब्रह्मांड और जीवन परंपराओं का जीवंत अभिलेख बताया।

सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक कैलाश खेर ने 6 जून 2025 को मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन पहुँचकर बाबा महाकालेश्वर के दरबार में शीश नवाया और प्रातःकालीन भस्म आरती में भाग लिया। दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने अपनी शिवभक्ति और सनातन संस्कृति के प्रति गहरी आस्था खुलकर व्यक्त की।

महाकाल दर्शन पर कैलाश खेर के उद्गार

बाबा महाकाल के दर्शन के बाद कैलाश खेर ने कहा कि महाकाल के प्रांगण में आना जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य प्राप्त करने जैसा अनुभव है। उन्होंने कहा, 'इस पवित्र भारत भूमि और सनातन परंपराओं के निर्वहन में जुटे लोगों को मैं प्रणाम करता हूँ। इस धरती पर जन्म लेना ही किसी सौभाग्य से कम नहीं है।' उनके अनुसार परमात्मा दिशाविहीन लोगों को राह दिखाने के लिए ही बार-बार अपने चरणों में बुलाते हैं।

अवंतिका नगरी का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

कैलाश खेर ने उज्जयिनी (अवंतिका नगरी) को पूरे ब्रह्मांड और मानव जीवन परंपराओं का जीवंत अभिलेख बताया। उन्होंने कहा, 'पहले कर्क रेखा भी यहीं से गुजरती थी, लेकिन समय बदला गया और कर्क रेखा यूरोप के पास चली गई। पहले विक्रम संवत से ही विश्व चलता था, लेकिन भारत अभी भी अपनी धारणाओं, विचारों और परंपराओं पर अडिग है। धीरे-धीरे वक्त बदल रहा है और अब समय भारत का ही है।'

तीर्थयात्राओं का सिलसिला

यह यात्रा एकाकी नहीं है — कैलाश खेर हाल के हफ्तों में कई प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा कर चुके हैं। 27 मई को वे बद्रीनाथ धाम पहुँचे और भगवान विष्णु का आशीर्वाद लिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बद्रीनाथ यात्रा की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे रुद्राक्ष की माला और माथे पर चंदन का तिलक लगाए, बर्फ से ढके पहाड़ों की पृष्ठभूमि में मुस्कुराते नजर आए। इससे पहले वे केदारनाथ धाम भी पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने मंदिर के सामने खड़े होकर अपना प्रसिद्ध भक्ति गीत 'बम लहरी' गाया और उसका वीडियो भी साझा किया। उस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा था, 'महादेव का धाम, पूरे सारे काम। जय जय केदार।'

नया गाना 'जोगी' और आध्यात्मिक संदेश

कैलाश खेर इन दिनों अपने नए गाने 'जोगी' को लेकर भी चर्चा में हैं, जो आदि शंकराचार्य को समर्पित है। इस गाने के बारे में उन्होंने कहा था कि सदियों से संतों और ऋषियों ने जिस आध्यात्मिक भावना को महसूस किया, वही भावना इस संगीत में भी है। उनके अनुसार आदि शंकराचार्य का संदेश आज भी लोगों को सच और धर्म के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। यह तीर्थयात्राओं की श्रृंखला और उनकी संगीत यात्रा दोनों मिलकर उनकी गहरी आध्यात्मिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बद्रीनाथ और अब महाकाल — महज व्यक्तिगत आस्था की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सार्वजनिक पहचान का निर्माण भी है। 'जोगी' जैसे गानों के साथ जोड़कर देखें तो यह स्पष्ट है कि वे अपनी कलात्मक और आध्यात्मिक छवि को एक साथ गढ़ रहे हैं। यह प्रवृत्ति बॉलीवुड और संगीत जगत में बढ़ती 'सनातन ब्रांडिंग' की व्यापक धारा का हिस्सा है, जिसे दर्शक और श्रोता दोनों बड़े पैमाने पर स्वीकार कर रहे हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश खेर ने उज्जैन में क्या किया?
कैलाश खेर ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन किए और प्रातःकालीन भस्म आरती में भाग लिया। दर्शन के बाद उन्होंने सनातन संस्कृति और उज्जयिनी के ऐतिहासिक महत्व पर अपने विचार साझा किए।
कैलाश खेर ने हाल ही में और कौन-कौन सी तीर्थयात्राएँ कीं?
उज्जैन से पहले कैलाश खेर 27 मई को बद्रीनाथ धाम पहुँचे थे और उससे पहले केदारनाथ धाम की यात्रा की थी। केदारनाथ में उन्होंने अपना भक्ति गीत 'बम लहरी' मंदिर के सामने गाया था।
कैलाश खेर का नया गाना 'जोगी' किसे समर्पित है?
'जोगी' गाना आदि शंकराचार्य को समर्पित है। कैलाश खेर ने कहा कि इस संगीत में वही आध्यात्मिक भावना है जो सदियों से संतों और ऋषियों ने महसूस की है।
कैलाश खेर ने उज्जैन के बारे में क्या कहा?
कैलाश खेर ने उज्जयिनी (अवंतिका नगरी) को पूरे ब्रह्मांड और मानव जीवन परंपराओं का जीवंत अभिलेख बताया। उन्होंने कहा कि पहले कर्क रेखा भी यहीं से गुजरती थी और विक्रम संवत से विश्व चलता था।
भस्म आरती क्या होती है और यह महाकाल मंदिर में क्यों खास है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की अनूठी प्रातःकालीन पूजा है, जिसमें चिता भस्म से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। यह देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल मंदिर की सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक परंपरा मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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