भारतीय पत्रकारों ने पुलित्जर पुरस्कार जीता, साइबर अपराध और डिजिटल ठगी का किया पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
न्यूयॉर्क में 5 मई 2025 को घोषित पुलित्जर पुरस्कारों में तीन भारतीय पत्रकारों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की, जिन्होंने भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में फैले साइबर अपराध तथा डिजिटल ठगी के जटिल जाल को अपनी खोजी रिपोर्टिंग से उजागर किया। अमेरिका के इस सर्वोच्च पत्रकारिता सम्मान की घोषणा कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा की गई।
किसे मिला पुरस्कार
आनंद आरके और सुपना शर्मा को नैटली ओबिको पियर्सन के साथ मिलकर 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री' श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई उनकी खोजी रिपोर्ट के लिए दिया गया, जिसमें भारत में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल ठगी की परतें उधेड़ी गई थीं। आनंद मुंबई के एक अनुभवी इलस्ट्रेटर और विज़ुअल आर्टिस्ट हैं, जबकि सुपना शर्मा भारत में सक्रिय फ्रीलांस खोजी पत्रकार हैं।
रिपोर्ट की मुख्य कहानी
ब्लूमबर्ग की इस सचित्र रिपोर्ट के केंद्र में लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन की दिल दहला देने वाली कहानी है। साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उन्हें छह दिनों तक 'डिजिटल नजरबंदी' में रखा और उनके बैंक खातों से ₹2.8 करोड़ की ठगी कर ली। पुलित्जर पुरस्कार की घोषणा में कहा गया कि इस रिपोर्ट ने निगरानी और डिजिटल ठगी जैसी बढ़ती वैश्विक समस्याओं को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
फाइनलिस्ट और अन्य भारतीय पत्रकार
इसी 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री' श्रेणी में एक और भारतीय पत्रकार देवज्योत घोषाल फाइनलिस्ट रहे। बैंकॉक स्थित देवज्योत ने दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध और मानव तस्करी के उस खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जिसमें भारत सहित कई देशों के लोगों को जबरन कैंपों में कैद कर दूसरे देशों के नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करवाई जाती है।
वहीं, हनोई में कार्यरत रिपोर्टर अनिरुद्ध घोषाल ने 'इंटरनेशनल रिपोर्टिंग' श्रेणी में पुरस्कार जीता। उन्होंने अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल द्वारा बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा रहे गुप्त निगरानी उपकरणों की गहन जाँच की थी। आँकड़ों के अनुसार, ये उपकरण मूल रूप से सिलिकॉन वैली में विकसित किए गए थे और बाद में चीन में और उन्नत किए गए। इस रिपोर्ट सीरीज में यह भी उजागर किया गया कि चीन और अन्य देश इन उपकरणों का किस प्रकार उपयोग कर रहे हैं।
पुलित्जर पुरस्कार का महत्व
पुलित्जर पुरस्कार अमेरिका का सर्वोच्च पत्रकारिता सम्मान है, जिसका संचालन कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा किया जाता है। गौरतलब है कि यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर पत्रकारिता की उत्कृष्टता की कसौटी माना जाता है। भारतीय पत्रकारों की इस उपलब्धि ने देश की खोजी पत्रकारिता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।
आगे क्या
इन रिपोर्टों से साइबर अपराध और डिजिटल निगरानी पर वैश्विक बहस और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खोजी पत्रकारिता नीति-निर्माताओं पर ठोस कदम उठाने का दबाव बनाती है।