भारतीय पत्रकारों ने पुलित्जर पुरस्कार जीता, साइबर अपराध और डिजिटल ठगी का किया पर्दाफाश

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भारतीय पत्रकारों ने पुलित्जर पुरस्कार जीता, साइबर अपराध और डिजिटल ठगी का किया पर्दाफाश

सारांश

भारतीय पत्रकारों ने इस बार पुलित्जर के मंच पर तिहरा झंडा गाड़ा — आनंद आरके और सुपना शर्मा ने लखनऊ की डॉक्टर से ₹2.8 करोड़ की ठगी की कहानी को विश्वस्तरीय पत्रकारिता में बदल दिया, जबकि अनिरुद्ध घोषाल ने अमेरिकी सीमा पर चीनी निगरानी तकनीक का पर्दाफाश किया।

मुख्य बातें

आनंद आरके और सुपना शर्मा ने नैटली ओबिको पियर्सन के साथ 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री' श्रेणी में पुलित्जर पुरस्कार 2025 जीता।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन से ₹2.8 करोड़ की डिजिटल ठगी की कहानी केंद्र में थी।
देवज्योत घोषाल इसी श्रेणी में फाइनलिस्ट रहे; उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में मानव तस्करी और साइबर अपराध का खुलासा किया।
हनोई स्थित अनिरुद्ध घोषाल ने 'इंटरनेशनल रिपोर्टिंग' श्रेणी में पुरस्कार जीता; अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल के गुप्त निगरानी उपकरणों की जाँच की।
पुरस्कारों की घोषणा कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा 5 मई 2025 को की गई।

न्यूयॉर्क में 5 मई 2025 को घोषित पुलित्जर पुरस्कारों में तीन भारतीय पत्रकारों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की, जिन्होंने भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में फैले साइबर अपराध तथा डिजिटल ठगी के जटिल जाल को अपनी खोजी रिपोर्टिंग से उजागर किया। अमेरिका के इस सर्वोच्च पत्रकारिता सम्मान की घोषणा कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा की गई।

किसे मिला पुरस्कार

आनंद आरके और सुपना शर्मा को नैटली ओबिको पियर्सन के साथ मिलकर 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री' श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई उनकी खोजी रिपोर्ट के लिए दिया गया, जिसमें भारत में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल ठगी की परतें उधेड़ी गई थीं। आनंद मुंबई के एक अनुभवी इलस्ट्रेटर और विज़ुअल आर्टिस्ट हैं, जबकि सुपना शर्मा भारत में सक्रिय फ्रीलांस खोजी पत्रकार हैं।

रिपोर्ट की मुख्य कहानी

ब्लूमबर्ग की इस सचित्र रिपोर्ट के केंद्र में लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन की दिल दहला देने वाली कहानी है। साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उन्हें छह दिनों तक 'डिजिटल नजरबंदी' में रखा और उनके बैंक खातों से ₹2.8 करोड़ की ठगी कर ली। पुलित्जर पुरस्कार की घोषणा में कहा गया कि इस रिपोर्ट ने निगरानी और डिजिटल ठगी जैसी बढ़ती वैश्विक समस्याओं को प्रभावी ढंग से सामने रखा।

फाइनलिस्ट और अन्य भारतीय पत्रकार

इसी 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री' श्रेणी में एक और भारतीय पत्रकार देवज्योत घोषाल फाइनलिस्ट रहे। बैंकॉक स्थित देवज्योत ने दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध और मानव तस्करी के उस खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जिसमें भारत सहित कई देशों के लोगों को जबरन कैंपों में कैद कर दूसरे देशों के नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करवाई जाती है।

वहीं, हनोई में कार्यरत रिपोर्टर अनिरुद्ध घोषाल ने 'इंटरनेशनल रिपोर्टिंग' श्रेणी में पुरस्कार जीता। उन्होंने अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल द्वारा बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा रहे गुप्त निगरानी उपकरणों की गहन जाँच की थी। आँकड़ों के अनुसार, ये उपकरण मूल रूप से सिलिकॉन वैली में विकसित किए गए थे और बाद में चीन में और उन्नत किए गए। इस रिपोर्ट सीरीज में यह भी उजागर किया गया कि चीन और अन्य देश इन उपकरणों का किस प्रकार उपयोग कर रहे हैं।

पुलित्जर पुरस्कार का महत्व

पुलित्जर पुरस्कार अमेरिका का सर्वोच्च पत्रकारिता सम्मान है, जिसका संचालन कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा किया जाता है। गौरतलब है कि यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर पत्रकारिता की उत्कृष्टता की कसौटी माना जाता है। भारतीय पत्रकारों की इस उपलब्धि ने देश की खोजी पत्रकारिता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।

आगे क्या

इन रिपोर्टों से साइबर अपराध और डिजिटल निगरानी पर वैश्विक बहस और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खोजी पत्रकारिता नीति-निर्माताओं पर ठोस कदम उठाने का दबाव बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी दौर में भारतीय पत्रकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर सर्वोच्च सम्मान पा रहे हैं। साइबर ठगी और डिजिटल निगरानी पर ये रिपोर्टें केवल अपराध की कहानियाँ नहीं हैं — ये राज्य और तकनीक के बीच बढ़ते असंतुलन की चेतावनी हैं। सवाल यह है कि क्या इन पुरस्कारों की रोशनी में भारत की नीति-निर्माण प्रक्रिया साइबर अपराध के खिलाफ उतनी ही सक्रिय होगी, जितनी ये पत्रकार अपनी कलम से रही हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुलित्जर पुरस्कार 2025 जीतने वाले भारतीय पत्रकार कौन हैं?
आनंद आरके, सुपना शर्मा और अनिरुद्ध घोषाल ने पुलित्जर पुरस्कार 2025 जीता। आनंद और सुपना को 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री' श्रेणी में ब्लूमबर्ग की साइबर अपराध रिपोर्ट के लिए, जबकि अनिरुद्ध को 'इंटरनेशनल रिपोर्टिंग' श्रेणी में सम्मानित किया गया।
ब्लूमबर्ग की पुलित्जर विजेता रिपोर्ट किस बारे में थी?
यह रिपोर्ट लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन की कहानी पर केंद्रित थी, जिन्हें साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर छह दिन तक डिजिटल नजरबंदी में रखा और ₹2.8 करोड़ की ठगी की। इसने भारत में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल ठगी की वैश्विक समस्या को उजागर किया।
अनिरुद्ध घोषाल ने किस विषय पर रिपोर्टिंग की थी?
हनोई स्थित अनिरुद्ध घोषाल ने अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल द्वारा उपयोग किए जा रहे गुप्त निगरानी उपकरणों की जाँच की, जो मूल रूप से सिलिकॉन वैली में बने थे और बाद में चीन में विकसित किए गए। उनकी रिपोर्ट सीरीज ने यह भी बताया कि चीन और अन्य देश इन उपकरणों का किस तरह उपयोग कर रहे हैं।
पुलित्जर पुरस्कार क्या है और इसे कौन देता है?
पुलित्जर पुरस्कार अमेरिका का सर्वोच्च पत्रकारिता सम्मान है, जिसका संचालन न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा किया जाता है। यह पुरस्कार पत्रकारिता, साहित्य और संगीत में उत्कृष्टता के लिए प्रतिवर्ष दिया जाता है।
देवज्योत घोषाल की रिपोर्ट किस विषय पर थी?
बैंकॉक स्थित देवज्योत घोषाल ने दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध और मानव तस्करी के उस नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जिसमें भारत सहित कई देशों के लोगों को कैंपों में कैद कर अन्य देशों के नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करवाई जाती है। वे इस श्रेणी में फाइनलिस्ट रहे।
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