ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत ने साधे आर्थिक-रणनीतिक हित, EU-GCC व्यापार समझौते से नई साझेदारियाँ
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत ने 28 फरवरी से 18 जून 2026 तक चले अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए कई निर्णायक कदम उठाए। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा, लेकिन भारत ने व्यापार विविधीकरण, नई ऊर्जा साझेदारियों और सक्रिय कूटनीति के ज़रिए इस संकट को अवसर में बदलने की कोशिश की।
व्यापार विविधीकरण: भारत की मुख्य रणनीति
मध्य पूर्व में सप्लाई संकट गहराते ही भारत ने अपने व्यापारिक रिश्तों को तेज़ी से विविध किया। फरवरी 2026 में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) — जिसमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन शामिल हैं — के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर हस्ताक्षर किए गए। इसी अवधि में भारत ने अमेरिका के साथ भी एक बड़ा व्यापारिक समझौता किया। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया संकट के बीच यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया — जो अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि में एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा: रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया
होर्मुज जलमार्ग के अवरुद्ध होने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर सीधा खतरा मंडराया। भारत ने राजनयिक दबावों के बावजूद रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा किया। यह ऐसे समय में आया जब पश्चिमी देश रूसी तेल पर निर्भरता कम करने का दबाव बना रहे थे। गौरतलब है कि यह भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति के अनुरूप कदम है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा को किसी भी गुट के दबाव से ऊपर रखा जाता है।
PM मोदी की बहुदेशीय कूटनीतिक यात्राएँ
संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों का दौरा कर नए गठबंधन मज़बूत किए। ईरान पर हमले से पहले उन्होंने मलेशिया का दौरा किया, जहाँ व्यापार और पाम ऑयल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। हमले की शुरुआत से ठीक पहले मोदी इज़रायल पहुँचे, जहाँ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संतुलन पर चर्चा हुई।
मई 2026 में संघर्ष के चरम के दौरान मोदी ने एक साथ यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। यूएई के साथ ऊर्जा आपूर्ति पर समझौता हुआ, जबकि यूरोपीय देशों — विशेषकर इटली — के साथ ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान के तहत क्रिटिकल मिनरल्स और रक्षा सौदे संपन्न हुए। संघर्ष विराम से ठीक पहले मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया का भी दौरा किया।
भारत पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका को मज़बूत करने की कोशिश में है। 18 जून 2026 को अमेरिका-ईरान के बीच समझौता होने और होर्मुज के पुनः चालू होने के बाद भारत उन गिने-चुने देशों में रहा जिन्होंने संकट के दौरान नई व्यापारिक साझेदारियाँ स्थापित कीं। विश्लेषकों के अनुसार, नई व्यापारिक साझेदारियों, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और संतुलित कूटनीति के ज़रिए भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उसका लक्ष्य केवल नुकसान से बचना नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नए अवसरों को साधना भी है।