28 अगस्त 2026
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किम जोंग-उन ने नेपाल-चीन बाढ़ पर जताई संवेदना, 500 से अधिक मौतें; नई झील-विस्फोट चेतावनी जारी

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किम जोंग-उन ने नेपाल-चीन बाढ़ पर जताई संवेदना, 500 से अधिक मौतें; नई झील-विस्फोट चेतावनी जारी

सारांश

हिमालयी बाढ़ में 500 से अधिक मौतें और 1,500 लापता — और अब तिब्बत में झील फटने की नई चेतावनी। किम जोंग-उन ने शी जिनपिंग और राम चंद्र पौडेल को संवेदना भेजी, जबकि नेपाल के बचावकर्मी दोहरे संकट से जूझ रहे हैं।

मुख्य बातें

किम जोंग-उन ने 28 अगस्त को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को हिमालयी बाढ़ पर सहानुभूति संदेश भेजे।
26 अगस्त से अब तक चीन और नेपाल में 500 से अधिक मौतें और 1,500 से ज़्यादा लोग लापता।
NDRRMA ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे नई बाढ़ की चेतावनी जारी की।
चीन के तिब्बती इलाके में एक झील फटने की रिपोर्ट के बाद नेपाल में दूसरी बाढ़ का खतरा।
नेपाल पुलिस ने भी स्वतंत्र रूप से चेतावनी जारी कर बचावकर्मियों और नागरिकों को सतर्क रहने को कहा।

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने शुक्रवार, 28 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के मद्देनज़र चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को औपचारिक सहानुभूति संदेश भेजे। 26 अगस्त को चीन से सटे हिमालयी इलाके में आई भीषण बाढ़ के बाद 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1,500 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं।

किम के संदेशों में क्या था

कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (KCNA) के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भेजे संदेश में किम ने चीनी नेतृत्व, वहाँ की पार्टी, सरकार, जनता, पीड़ितों और शोकाकुल परिवारों के प्रति 'गहरी संवेदना' व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आपदा-प्रभावित क्षेत्र शीघ्र सामान्य स्थिति में लौटेंगे और वहाँ के लोग पुनः शांति व स्थिरता का अनुभव कर सकेंगे।

KCNA की एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को भेजे संदेश में किम ने नेपाल सरकार, वहाँ की जनता, पीड़ितों और शोकसंतप्त परिवारों के प्रति 'सच्ची संवेदना और सहानुभूति' प्रकट की। यह संदेश विशेष रूप से मृतकों और लापता लोगों की संख्या के संदर्भ में था।

नई झील-विस्फोट चेतावनी — बढ़ता खतरा

इस बीच, 28 अगस्त को ही नेपाली अधिकारियों ने एक और बड़े खतरे की चेतावनी जारी की। अधिकारियों को सूचना मिली कि चीन के तिब्बती इलाके में एक झील के फटने से नेपाल में पुनः बाढ़ आ सकती है।

नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने अपने नोटिस में कहा कि रसुवा ज़िले में भोटे कोशी नदी के उसी क्षेत्र में मलबे और कीचड़ के साथ पानी का बहाव फिर से बढ़ गया है, जहाँ 26 अगस्त को भीषण बाढ़ आई थी। अथॉरिटी ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बचाव और राहत कार्यों में लगे सभी कर्मियों तथा जोखिम वाले इलाकों में मौजूद लोगों से तत्काल सावधानी बरतने और खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की।

नेपाल पुलिस ने भी स्वतंत्र रूप से तिब्बती इलाके में झील फटने की पुष्टि करते हुए चेतावनी जारी की और बचावकर्मियों सहित आम नागरिकों को सतर्क रहने को कहा।

आपदा का दायरा और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हर वर्ष होती हैं, किंतु इस बार की तबाही असाधारण रूप से व्यापक है। 500 से अधिक मौतें और 1,500 से ज़्यादा लापता लोगों के साथ यह हाल के वर्षों की सबसे घातक हिमालयी बाढ़ आपदाओं में से एक बताई जा रही है। चीन और नेपाल दोनों देशों के सीमावर्ती इलाके इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल पहले से ही मानसूनी आपदाओं से जूझ रहा है और बचाव तंत्र पर भारी दबाव है। तिब्बती झील के फटने की नई चेतावनी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

आगे क्या होगा

NDRRMA और नेपाल पुलिस की संयुक्त चेतावनियों के बाद राहत व बचाव अभियान जारी है, लेकिन नई बाढ़ का खतरा इन प्रयासों को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है। अधिकारियों ने लोगों से नदी किनारों से दूर रहने और आपातकालीन निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और राहत सहायता के आँकड़े अभी सामने आने बाकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ बचाव तंत्र पहले से दबाव में है और तिब्बती झील फटने की नई चेतावनी ने राहत अभियान को और जोखिम भरा बना दिया है। मुख्यधारा की कवरेज किम के संदेश पर केंद्रित है, जबकि NDRRMA की दोहरी बाढ़ चेतावनी — जो सीधे जीवन को प्रभावित करती है — उतनी प्रमुखता नहीं पा रही। हिमालयी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट की बढ़ती आवृत्ति जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रश्न को भी उठाती है, जिस पर क्षेत्रीय सहयोग अभी भी अपर्याप्त है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किम जोंग-उन ने किसे और क्यों संवेदना संदेश भेजे?
किम जोंग-उन ने 28 अगस्त को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को हिमालयी बाढ़ में हुई जनहानि पर सहानुभूति संदेश भेजे। KCNA के अनुसार, दोनों संदेशों में पीड़ितों और शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।
नेपाल-चीन बाढ़ में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद 28 अगस्त तक चीन और नेपाल में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1,500 से ज़्यादा लोग लापता हैं। यह हाल के वर्षों की सबसे घातक हिमालयी बाढ़ आपदाओं में से एक बताई जा रही है।
नेपाल में नई बाढ़ की चेतावनी क्यों जारी की गई?
नेपाली अधिकारियों को सूचना मिली कि चीन के तिब्बती इलाके में एक झील फट गई है, जिससे भोटे कोशी नदी में पानी और मलबे का बहाव फिर से बढ़ गया है। NDRRMA ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बचावकर्मियों और नागरिकों को तत्काल सतर्क रहने की अपील की है।
NDRRMA क्या है और इसने क्या कहा?
NDRRMA यानी नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी नेपाल की आपदा प्रबंधन की शीर्ष संस्था है। इसने 28 अगस्त को नोटिस जारी कर कहा कि रसुवा में भोटे कोशी नदी के उसी इलाके में पानी का बहाव फिर बढ़ा है जहाँ 26 अगस्त को बड़ी बाढ़ आई थी, और खतरा दिखने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश दिया।
हिमालयी क्षेत्र में इस बार की बाढ़ पिछले वर्षों से कितनी अलग है?
मानसून के दौरान हिमालयी बाढ़ और भूस्खलन सामान्य घटनाएँ हैं, लेकिन इस बार 500 से अधिक मौतें और 1,500 लापता लोगों के साथ यह आपदा असाधारण रूप से विनाशकारी है। तिब्बती झील फटने की अतिरिक्त चेतावनी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जो ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट की बढ़ती आवृत्ति की ओर संकेत करती है।
राष्ट्र प्रेस
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