यूएन महासभा ने 140 मतों से CCIT अपनाने का आग्रह किया, भारत ने दोहरे मानदंडों को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 जुलाई 2026 को 140 मतों के भारी बहुमत से भारत द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (CCIT) को अपनाने के लिए सदस्य देशों से 'हरसंभव प्रयास' करने का आग्रह किया। यह प्रस्ताव यूएन वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (GCTS) की नौवीं समीक्षा के अंतर्गत पारित हुआ, जिसके विरोध में केवल तीन मत पड़े।
CCIT क्या है और क्यों है लंबित
भारत ने CCIT को 31 वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र में पेश किया था, किंतु यह अब तक अनुमोदन की प्रतीक्षा में है। इस अभिसमय का उद्देश्य आतंकवाद से जुड़ी कानूनी कमियों को दूर करना, अभियोजन और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना तथा आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाहों, धन और हथियारों तक पहुँच से वंचित करना है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने चेतावनी दी कि 'सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत कानूनी ढाँचे' के अभाव ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक संघर्ष को कमज़ोर किया है।
भारत का पक्ष: दोहरे मानदंड अस्वीकार्य
हरीश ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का प्रभावी मुकाबला तभी संभव है जब 'दोहरे मानदंड न हों' और 'अच्छे तथा बुरे आतंकवादियों' के बीच कोई भेद न किया जाए। उन्होंने कहा, 'आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता। किसी भी प्रकार की शिकायत, राजनीतिक उद्देश्य या रणनीतिक गणना के बावजूद आतंकवाद को उसके हर रूप और अभिव्यक्ति में बिना किसी शर्त के निंदा की जानी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी घटनाओं के 'अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों' को जवाबदेह ठहराना और न्याय के कटघरे में लाना सभी सदस्य देशों की साझा ज़िम्मेदारी है।
विरोध की राजनीति: पाकिस्तान और अन्य देश
CCIT का विरोध मुख्यतः पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों की ओर से होता रहा है, जो आतंकवादियों के बीच भेद करने की कोशिश करते हैं और कुछ को 'स्वतंत्रता सेनानी' का दर्जा देकर आतंकवाद के समर्थन को उचित ठहराने का प्रयास करते हैं। इस बार मतदान में अमेरिका के आग्रह पर वोटिंग कराई गई, जिसने GCTS की समीक्षा को 'अनावश्यक रूप से विस्तृत, पुराना और फोकस से रहित' बताया। इज़रायल और अर्जेंटीना ने अमेरिका के साथ विरोध में मत दिया, जबकि 49 देश अनुपस्थित रहे। जापान ने मतदान में औपचारिक रूप से भाग नहीं लिया, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि यह एक तकनीकी त्रुटि थी और वह दस्तावेज़ का समर्थन करता है।
धार्मिक भेदभाव पर भारत की व्यापक चिंता
हरीश ने पूर्वाग्रह और भेदभाव से निपटने के संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों में केवल अब्राहमिक धर्मों पर केंद्रित दृष्टिकोण पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'हम इस्लामोफोबिया, ईसाई-विरोध और यहूदी-विरोध से प्रेरित सभी कृत्यों की निंदा करते हैं, लेकिन इस प्रतिष्ठित संस्था को यह भी स्वीकार करना चाहिए कि इस प्रकार के पूर्वाग्रह अन्य धर्मों के प्रति भी मौजूद हैं।' गौरतलब है कि यह GCTS की वह समीक्षा है जो 2006 में महासभा द्वारा पहली बार मंजूरी मिलने के बाद से हर दो वर्ष में होती है और सामान्यतः सर्वसम्मति से अपनाई जाती रही है।
आगे की राह
हरीश ने कहा कि 'अब समय आ गया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए CCIT को अंतिम रूप दिया जाए।' यह मतदान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आतंकवाद की घटनाएँ बढ़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की माँग पहले से कहीं अधिक प्रबल है। CCIT के अनुमोदन की दिशा में यह बहुमत एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है, भले ही बाध्यकारी समझौते तक पहुँचने की राह अभी लंबी है।