जयपुर में डीएनटी आरक्षण प्रदर्शन हिंसक: पुलिस ने लाठीचार्ज किया, 50 हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर में 1 जुलाई 2026 की शाम खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश (डीएनटी) समुदायों की विद्याधर नगर स्टेडियम में आयोजित महापंचायत के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। 10 प्रतिशत आरक्षण की माँग को लेकर एकत्रित प्रदर्शनकारियों ने जब मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया, तो पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोका और स्थिति हिंसक हो गई। इस घटना में पुलिसकर्मियों और स्थानीय निवासियों सहित एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए और करीब 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार शाम करीब 6 बजे महापंचायत की समाप्ति के बाद प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च की घोषणा की। पुलिस ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी और बैरिकेड लगा दिए थे। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, तो झड़प शुरू हो गई जो जल्द ही हिंसक रूप ले गई।
कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों और नागरिकों पर पत्थर फेंके, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया। भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद अधिकारियों ने बताया कि स्थिति बाद में नियंत्रण में आ गई।
पुलिस का पक्ष
डीसीपी (उत्तर) करण शर्मा ने बताया कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बीच बैठक कराई थी और चर्चा सकारात्मक रही थी। शर्मा के अनुसार, बातचीत के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी अचानक आक्रामक हो गए, उन्होंने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया और कथित तौर पर स्थानीय निवासियों के साथ दुर्व्यवहार किया।
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों और नागरिकों दोनों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद बल प्रयोग किया गया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता टीका राम जुली ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को 'अत्यंत निंदनीय' बताते हुए कहा कि यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। जुली ने आरोप लगाया कि सरकार की यह कार्रवाई समाज के कमजोर, वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों के प्रति उसकी असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
आम जनता पर असर
घटना जयपुर के उत्तरी हिस्से में हुई जहाँ भारी पुलिस बल की तैनाती से यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में विभिन्न समुदायों की आरक्षण माँगें लंबे समय से लंबित हैं। गौरतलब है कि डीएनटी समुदाय देश भर में अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।
क्या होगा आगे
हिरासत में लिए गए करीब 50 प्रदर्शनकारियों के मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अपेक्षित है। डीएनटी समुदाय की 10 प्रतिशत आरक्षण की माँग पर सरकार का आधिकारिक रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। विपक्ष के दबाव और घायलों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार पर वार्ता की माँग तेज हो सकती है।