कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी नेता जय प्रकाश मजूमदार को दी अंतरिम जमानत, फूलबागान में प्रवेश पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 1 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को अंतरिम जमानत प्रदान की। न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी की एकल पीठ ने यह राहत कुछ कड़ी शर्तों के साथ दी है। मजूमदार को 3 जून को बिधाननगर स्थित एक आवासीय फ्लैट पर कथित अवैध कब्जे के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
जमानत की शर्तें
अदालत ने अंतरिम जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि जय प्रकाश मजूमदार कोलकाता और बिधाननगर की सीमाएँ नहीं छोड़ सकते। इसके अलावा, वे फूलबागान क्षेत्र में भी प्रवेश नहीं कर सकते, जहाँ विवादित फ्लैट स्थित है। इन शर्तों का उद्देश्य मामले की जाँच को प्रभावित होने से बचाना और शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायत के अनुसार, बिधाननगर के AE-337 नंबर के फ्लैट की मालकिन आरती रायचौधरी हैं। मजूमदार ने कथित तौर पर 2012 में यह संपत्ति किराए पर ली थी, लेकिन किराया समझौता 2015 में समाप्त हो गया। फ्लैट मालकिन का आरोप है कि न तो कोई नया समझौता हुआ और न ही पुराना पट्टा नवीनीकृत किया गया — फिर भी संपत्ति पर करीब 14 वर्षों तक कब्जा बना रहा। इस संबंध में बिधाननगर उत्तर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
गिरफ्तारी और आरोप
पुलिस के अनुसार, मजूमदार अपनी पत्नी के साथ साल्ट लेक स्थित उसी मकान में रह रहे थे। मकान मालकिन ने बिधाननगर (उत्तर) थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि मजूमदार लंबे समय से किराया नहीं दे रहे थे और किराया माँगने पर राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर धमकाते व दुर्व्यवहार करते थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि मजूमदार 2014 में मामूली किराए पर उस मकान में आए थे, लेकिन कुछ समय बाद किराया देना बंद कर दिया। मकान मालकिन के पति के निधन के बाद संपत्ति का स्वामित्व उनकी पत्नी को मिला था।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाइयों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। मजूमदार पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में एक वरिष्ठ पद पर हैं, और उनकी गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति में हलचल मचाई थी। TMC ने इस गिरफ्तारी पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आगे की कार्यवाही
अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की है। मजूमदार को जमानत शर्तों का पालन करते हुए अदालत में उपस्थित रहना होगा। गौरतलब है कि अंतरिम जमानत स्थायी राहत नहीं है और अदालत अगली सुनवाई में इसे बरकरार रखने या वापस लेने का निर्णय ले सकती है।