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उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर: जिन्होंने विलुप्ति के कगार से बचाई ध्रुपद-धमार की परंपरा
जिया फरीदुद्दीन डागर ने खुद माना था — ध्रुपद लगभग खत्म हो चुका था। फिर भी उन्होंने और उनके भाई जिया मोहिउद्दीन ने मिलकर इसे यूरोप तक पहुँचाया, भोपाल में ध्रुपद केंद्र चलाया और डागर वाणी को अगली पीढ़ी…